Udaipur News: राजस्थान विद्यापीठ यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर सस्पेंड, 10 लाख की अनियमितताओं का आरोप

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उदयपुर स्थित राजस्थान विद्यापीठ यूनिवर्सिटी में योग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दिलीप सिंह चौहान को लगभग 10 लाख रुपये की वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोपों में जांच लंबित होने के कारण निलंबित किया गया।

Udaipur Vidyapeeth University Professor Suspended | Dilip Singh Chauhan  Irregularities

उदयपुर में जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ यूनिवर्सिटी के योग एवं शारीरिक शिक्षा विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दिलीप सिंह चौहान को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। उन पर करीब 10 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप हैं।

विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. तरुण श्रीमाली ने बताया कि डॉ. चौहान के विरुद्ध अनियमितताओं की विभागीय जांच लंबित है। जांच निष्पक्ष रूप से संपन्न हो, इसी को ध्यान में रखते हुए उन्हें निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में उन्हें केंद्रीय कार्यालय में अपनी नियमित उपस्थिति दर्ज करानी होगी। डॉ. चौहान माणिक्य लाल वर्मा श्रमजीवी महाविद्यालय में लंबे समय से योग एवं शारीरिक शिक्षा विभाग में कार्यवाहक निदेशक के पद पर कार्यरत थे।

10 लाख रुपये की वित्तीय गड़बड़ियों का आरोप
प्रशासन के अनुसार, पद पर रहते हुए डॉ. चौहान पर लगभग 10 लाख रुपये की वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताएं करने के आरोप हैं। इन्हीं तथ्यों के आधार पर उनके खिलाफ विभागीय जांच प्रक्रिया शुरू की गई है।

रजिस्ट्रार ने यह भी बताया कि जांच समिति के गठन के बाद डॉ. चौहान द्वारा जांच को प्रभावित करने के प्रयास किए गए। साथ ही सोशल मीडिया के माध्यम से विश्वविद्यालय की छवि धूमिल करने और भ्रामक व तथ्यहीन जानकारी प्रसारित करने के आरोप भी सामने आए हैं।

डॉ. चौहान पर लगाए गए प्रमुख आरोप

विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जारी सूचना के अनुसार डॉ. चौहान पर निम्नलिखित आरोप लगाए गए हैं।

  • नियमित सेवा में रहते हुए बिना सक्षम अनुमति एक ही समय में विभिन्न पाठ्यक्रमों, परीक्षाओं एवं शैक्षणिक गतिविधियों में शामिल होकर दोहरा लाभ लेना।

  • तथ्यों को छिपाकर एवं नियमों के विपरीत शैक्षणिक डिग्रियां अर्जित करना।

  • ट्रैक सूट, ब्लेजर एवं अन्य सामग्री की खरीद में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं कर विश्वविद्यालय को आर्थिक नुकसान पहुंचाना।

  • पद का दुरुपयोग करते हुए हितों के टकराव की स्थिति उत्पन्न करना तथा पारिवारिक लाभ सुनिश्चित करना।

  • कर्तव्यों में घोर लापरवाही बरतना और विश्वविद्यालय की छवि को नुकसान पहुंचाना।

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि विभागीय जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

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