धार (मध्य प्रदेश) की विवादित भोजशाला को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश जारी किए हैं। बीते कई वर्षों से यह स्थल हिंदू और मुस्लिम पक्ष के बीच विवाद का केंद्र रहा है। इस साल बसंत पंचमी के दिन पूरे दिन पूजा-अर्चना की मांग को लेकर हिंदू पक्ष ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया था, जबकि मुस्लिम पक्ष ने इसका विरोध करते हुए याचिका दायर की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि दोनों पक्षों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान होना चाहिए और किसी भी तरह का हिंसक या विवादास्पद माहौल नहीं बनने दिया जाएगा। कोर्ट ने निर्देश दिया कि हिंदू पक्ष को सूर्योदय से सूर्यास्त तक प्रार्थना करने की अनुमति दी जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि स्थल पर प्रार्थना शांतिपूर्ण तरीके से की जाए और किसी भी तरह के तनाव से बचा जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला धार्मिक स्थलों के विवादों में न्यायिक संतुलन का उदाहरण है। अदालत ने दोनों पक्षों से आग्रह किया कि वे शांतिपूर्ण संवाद और समझौते के जरिए विवाद का स्थायी समाधान खोजें।
धार भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश से स्पष्ट संदेश गया है कि न्यायालय धार्मिक स्वतंत्रता और सांप्रदायिक सौहार्द दोनों को महत्व देता है। अब दोनों पक्षों को कोर्ट की शर्तों के अनुसार अपनी गतिविधियों को नियमित करना होगा।
इस मामले ने एक बार फिर यह दिखाया कि धार्मिक स्थलों को लेकर विवाद होने पर कानूनी प्रक्रिया और न्यायिक हस्तक्षेप कितने महत्वपूर्ण होते हैं।