मुंबई में बन रहे ‘बिहार भवन’ को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बवाल तेज हो गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे के करीबी नेताओं ने इस प्रोजेक्ट को लेकर चेतावनी दी है और इसे लेकर विरोध जताया है। उनका कहना है कि इस तरह के भवनों के निर्माण से स्थानीय नागरिकों और मराठी समाज के हितों पर असर पड़ सकता है, और इसे लेकर सरकारी अधिकारियों और राजनीतिक दलों को गंभीरता से कदम उठाना चाहिए।
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राज ठाकरे की पार्टी का कहना है कि मुंबई जैसे शहर में राज्य विशेष या किसी अन्य राज्य के लिए भवन बनाना संवेदनशील मुद्दा बन सकता है। उनके नेताओं ने कहा कि अगर महाराष्ट्र की स्थानीय भावनाओं का ध्यान नहीं रखा गया तो आंदोलन भी हो सकता है। इसके अलावा, कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा चुनावी समय में राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी बन सकता है, क्योंकि शहर में मराठी पहचान और अधिकारों को लेकर हमेशा संवेदनशीलता रही है।
वहीं, बिहार भवन के पक्ष में राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक सांस्कृतिक और सामाजिक केंद्र होगा, जिसका मकसद बिहारियों को मुंबई में उनके सांस्कृतिक और प्रशासनिक कामों में सुविधा प्रदान करना है। उनका दावा है कि भवन का निर्माण नियमों और कानूनों के अनुसार किया जा रहा है और स्थानीय समुदायों को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महाराष्ट्र में बहुसांस्कृतिक शहरों और राज्यों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती को भी उजागर करता है। आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी और स्थानीय विरोध प्रदर्शन बढ़ सकते हैं, और इस मामले पर प्रशासनिक कार्रवाई पर निगाहें बनी रहेंगी।