स्लॉटर हाउस का काला सच: अफसरों की मेहरबानी और सिस्टम की छांव में कैसे पनपा असलम चमड़ा का साम्राज्य

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Shikha Bhardwaj

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देश में मवेशियों के स्लॉटर हाउस यानी कसाईघरों के पीछे की असलियत अब धीरे-धीरे सामने आ रही है। असलम नाम के कारोबारी ने स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत और सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर चमड़ा और मांस के बड़े साम्राज्य की नींव रखी। पड़ताल में पता चला है कि वह नियमों की धज्जियां उड़ाकर हजारों क्विंटल मांस और चमड़ा का व्यापार कर रहा था, जबकि संबंधित विभाग और पुलिस प्रशासन इस पर आंखें बंद किए हुए थे।

स्लॉटर हाउस का काला सच:अफसरों की मेहरबानी और सिस्टम की छांव में कैसे पनपा  असलम चमड़ा का साम्राज्य - Inside The Slaughterhouse Scandal: How Official  Favors Helped Aslam ...

जानकारी के मुताबिक असलम चमड़ा ने कई स्लॉटर हाउस बिना लाइसेंस के चलाए। इन हाउसों में न तो सफाई का ध्यान रखा जाता था और न ही पशुओं के ह्यूमन ट्रीटमेंट का। निरीक्षण अधिकारियों की मिलीभगत के चलते बड़े पैमाने पर नियमों का उल्लंघन किया गया और मांस व चमड़ा देशभर के बाजारों में सप्लाई होता रहा। ग्रामीण और कर्मचारी इस उद्योग के पीछे छुपे भ्रष्टाचार और बायपास सिस्टम से भयभीत थे।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामले केवल व्यक्तिगत अपराध नहीं हैं, बल्कि सिस्टम की खामियों और जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी का परिणाम हैं। यदि समय पर सख्त कार्रवाई की जाती, तो असलम चमड़ा जैसे कारोबारी के साम्राज्य को पनपने से रोका जा सकता था। अब पुलिस और एफएसएसआई (Food Safety and Standards Authority of India) ने मामले की जांच तेज कर दी है और ऐसे स्लॉटर हाउस के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने की तैयारी कर रही है।

अधिकारियों की मिलीभगत और प्रशासनिक लापरवाही के चलते बने इस साम्राज्य ने न केवल कानून को चुनौती दी, बल्कि स्वास्थ्य और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा किया। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे सिस्टमिकल फेलियर्स पर पैनी नजर रखनी होगी और शून्य-सहनशीलता नीति अपनाकर ही भविष्य में मांस उद्योग और चमड़ा व्यापार को सुरक्षित बनाया जा सकता है।

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Author: Shikha Bhardwaj

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