तीनों एसएमओ ने इसकी शिकायत स्वास्थ्य मंत्री डा. बलबीर सिंह को की है। वहीं यह मामला मुख्यमंत्री भगवंत मान के संज्ञान में भी लाया गया है। सिविल सर्जन डा. राज कुमार ने आरोपों को झूठा व बेबुनियाद बताया है।

मुक्तसर के तीन सरकारी अस्पतालों लंबी, दोदा व आलमवाला के सीनियर मेडिकल अफसरों (एसएमओ) ने सिविल सर्जन डा. राज कुमार पर रिश्वत मांगने के आरोप लगाए हैं। तीनों एसएमओ ने इसकी शिकायत स्वास्थ्य मंत्री डा. बलबीर सिंह को की है। वहीं यह मामला मुख्यमंत्री भगवंत मान के संज्ञान में भी लाया गया है। सिविल सर्जन डा. राज कुमार ने आरोपों को झूठा व बेबुनियाद बताया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 14 जनवरी को दोदा के सरकारी अस्पताल के एसएमओ डा.राबिन कुमार, लंबी के एसएमओ डा. हरिंदरपाल सिंह व आलमवाला के एसएमओ ने स्वास्थ्य मंत्री को लिखित शिकायत भेजी है। शिकायत में डा. राबिन ने लिखा है कि वह दोदा में तैनात है। सिविल सर्जन मुक्तसर डा. राज कुमार द्वारा पिछले कुछ समय से अपने दफ्तर में बुलाकर रुपये की मांग की जा रही है।
शिकायत में डा. ने लिखा है कि चालक की बदली करने के लिए 5000 रुपये, इश्तिहार छपवाने के लिए 15,000 रुपये प्रति महीना और ऐनकें बांटने के लिए 3000 रुपये मांगे तथा इन रुपयों को यूजर चार्जेस में एडजस्ट करने के लिए कहा है। सरकारी काम की रिश्वत मांगी जा रही है। डा. रॉबिन कुमार ने स्वास्थ्य मंत्री से अपील करते हुए कि उन्हें इस रिश्वतखोर अधिकारी से बचाया जाए।
लंबी के एसएमओ डा. हरिंदरपाल सिंह ने शिकायत में लिखा कि वह सीएचसी लंबी में तैनात हैं और ईमानदारी से अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। सिविल सर्जन उनके सीएचसी लंबी के कर्मचारियों की डेपुटेशन बिना उनके ध्यान में लाए लगा रहे हैं, जिस कारण उन्हें अस्पताल चलाने में बहुत मुश्किलें आ रही हैं। वहीं सिविल सर्जन द्वारा दफ्तर में बुलाकर किसी न किसी बहाने रुपयों की मांग की जाती है। इन्हीं पैसों को यूजर चार्जेस में एडजस्ट करने के लिए कहा जाता है। डा. हरिंदरपाल के अनुसार सिविल सर्जन ने उससे 15,000 रुपये प्रति महीना की मांग की है। साथ ही दफ्तर में बुलाकर 3000 रुपये इश्तिहार छपवाने के लिए और ऐनकें बांटने के लिए भी रुपयों की मांग की जाती है। अब तक सिविल सर्जन उससे लगभग 25,000 रुपये जुटा कर ले गए हैं।
सिविल सर्जन डा. राज कुमार ने इन आरोपों को झूठा व बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि यह आरोप गलत हैं। वह तो एक जिम्मेदार पद पर तैनात हैं। ऐसा करने की सोच भी नहीं सकते। वे तो इन एसएमओ से विभाग से संबंधित कार्य ही लेते हैं।