दौसा जिले में बुजुर्ग पेंशनधारियों को अब फिंगरप्रिंट की समस्या और बैंक की कतारों से राहत मिलेगी। सीएससी द्वारा डिजीपे ऐप के जरिए चेहरा प्रमाणीकरण तकनीक शुरू की गई है, जिससे पेंशनधारियों को घर बैठे पेंशन मिल रही है।
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दौसा जिले के उम्रदराज पेंशनधारियों के लिए अब बैंक की लंबी कतारों और बार-बार फेल होने वाली फिंगरप्रिंट मशीनों से राहत मिलने जा रही है। केंद्र सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के उपक्रम कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) ने डिजीपे ऐप के माध्यम से ऐसी नई तकनीक शुरू की है, जिसने पेंशन वितरण की प्रक्रिया को पूरी तरह बदल दिया है।
48 हजार 938 पेंशनर्स की ई-केवाईसी लंबित होने से होती थी परेशानी
दौसा जिले में करीब 48 हजार 938 पेंशनर्स की ई-केवाईसी लंबित होने के कारण उनकी मासिक पेंशन पर संकट बना हुआ था। अब इस समस्या का समाधान चेहरा प्रमाणीकरण तकनीक के रूप में सामने आया है। जिलेभर में सीएससी संचालक मोबाइल फोन के जरिए गांव-गांव और घर-घर पहुंचकर बुजुर्गों की पेंशन फेस ऑथेंटिकेशन के माध्यम से निकालकर उन्हें घर पर ही राशि उपलब्ध करा रहे हैं।
यह सुविधा विशेष रूप से उन बुजुर्गों के लिए वरदान साबित हो रही है, जिनकी उंगलियों की रेखाएं उम्र के कारण घिस चुकी हैं या जो चलने-फिरने में असमर्थ हैं। अब तक पेंशन भुगतान में सबसे बड़ी बाधा बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट का बार-बार असफल होना था, लेकिन नई व्यवस्था में चेहरे की पहचान से तुरंत प्रमाणीकरण हो जाता है।
इस तकनीक में ‘लाइव आई ब्लिंक’ सिस्टम शामिल है, जिसमें पलक झपकाने से यह सुनिश्चित किया जाता है कि सामने वास्तविक व्यक्ति ही मौजूद है। इससे फर्जीवाड़े की संभावना भी समाप्त हो जाती है। अब सीएससी संचालकों को भारी-भरकम फिंगरप्रिंट स्कैनर साथ रखने की आवश्यकता नहीं है। मोबाइल कैमरा ही स्कैनर की भूमिका निभा रहा है, जिससे लेन-देन की प्रक्रिया तेज, सरल और अधिक सफल हो रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बुजुर्गों का भरोसा डिजिटल सेवाओं पर बढ़ेगा और डिजिटल इंडिया अभियान को भी मजबूती मिलेगी।
केंद्र सरकार की यह पहल डिजिटल इंडिया के उस संकल्प को साकार कर रही है, जिसमें तकनीक समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुविधा और सम्मान पहुंचाने का माध्यम बन रही है। बुजुर्गों के लिए अब पेंशन केवल एक भुगतान नहीं, बल्कि सम्मान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनती जा रही है।