भगवंत के लिए ‘संगरूर’ ही है मान: बदहाली से उबरकर अब ‘डॉक्टर’ तैयार करेगा भट्ठल कॉलेज, कैबिनेट मीटिंग में फैसला

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मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने गृह जिले संगरूर को अब तक का सबसे बड़ा ‘हेल्थ गिफ्ट’ दिया है। कैबिनेट बैठक में एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए, पिछले कई वर्षों से सफेद हाथी बन चुके बाबा हीरा सिंह भट्ठल इंजीनियरिंग कॉलेज के भविष्य को नई दिशा दे दी गई है।

medical college built in Lehragaga Sangrur decision taken in cabinet meeting

सीएम भगवंत मान की अगुवाई में शुक्रवार को हुई कैबिनेट की बैठक में कई फैसले लिए गए हैं। बैठक में फैसला लिया गया है कि लहरगागा में बाबा हीरा सिंह भट्ठल इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में मेडिकल कॉलेज बनेगा। साथ ही वहां पर तैनात 92 टीचरों के स्टाफ को दूसरे विभागों स्थानांतरित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने गृह जिले संगरूर को अब तक का सबसे बड़ा ‘हेल्थ गिफ्ट’ दिया है। कैबिनेट बैठक में एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए, पिछले कई वर्षों से सफेद हाथी बन चुके बाबा हीरा सिंह भट्ठल इंजीनियरिंग कॉलेज के भविष्य को नई दिशा दे दी गई है। अब यह संस्थान इंजीनियरिंग की जगह चिकित्सा के क्षेत्र में राज्य का नाम रोशन करेगा।

खंडहर बनने की कगार से ‘लाइफलाइन’ बनने तक का सफर
लहरागागा का यह परिसर जो कभी सरकारी उपेक्षा और वित्तीय संकट के कारण अपनी पहचान खो रहा था, अब इलाके की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बनेगा। मुख्यमंत्री ने स्थानीय भावनाओं और जरूरतों को समझते हुए इसे ओपन यूनिवर्सिटी बनाने के बजाय मेडिकल कॉलेज में तब्दील करने का साहसिक फैसला लिया। हरियाणा बॉर्डर से सटे इस पिछड़े इलाके के लोगों को अब इलाज के लिए चंडीगढ़ या पटियाला की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।

स्टाफ के लिए ‘दिवाली’ जैसा माहौल
इस फैसले का सबसे मानवीय पहलू उन कर्मचारियों से जुड़ा है जो पिछले 36 महीनों (3 साल) से बिना वेतन के अपना घर चला रहे थे। सरकार ने न केवल उनके बकाया वेतन का समाधान निकाला है, बल्कि पूरे स्टाफ को अन्य सरकारी विभागों में एडजस्ट करने की मंजूरी दे दी है। यह कदम कर्मचारियों के लिए किसी ‘संजीवनी’ से कम नहीं है।

 

 

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Author: NIMRA SALEEM

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