Maharashtra: सरकार के रडार पर 719 कर्मचारी, फर्जी प्रमाण पत्र इस्तेमाल करने का शक; मंत्री ने दी जानकारी

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Shikha Bhardwaj

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महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को विधानसभा में जानकारी दी कि राज्य में 719 सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र का इस्तेमाल करने की शिकायतें मिली हैं। दिव्यांग कल्याण मंत्री अतुल सावे ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार के निर्देश के बाद अब सभी प्रमाण पत्रों की अनिवार्य जांच शुरू कर दी गई है।फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र पर नौकरी करने वाले 27 कर्मचारी की खंगाली जा रही  कुंडली, जांच के बाद हो सकते हैं बर्खास्त - investigation on 27 employees  who worked on ...

मंत्री सावे ने कहा कि यह मामले विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने से जुड़े हैं। उन्होंने विधानसभा में बताया कि सतारा में 78, पुणे में 46 और लातूर में 26 कर्मचारियों के खिलाफ शिकायतें मिली हैं। इसके अलावा, पुणे में 21 कर्मचारियों को निलंबित किया गया और नंदुरबार में दो कर्मचारियों को पद से हटा दिया गया

सरकारी निर्देशों के अनुसार, जिन कर्मचारियों के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए या जिनकी दिव्यांगता 40% से कम आंकी गई, उनके खिलाफ ‘निःशक्त व्यक्ति अधिकार अधिनियम 2016’ की धारा 11 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही अनुशासनात्मक कदम भी उठाए जाएंगे।

मंत्री ने बताया कि 9 अक्टूबर को जारी नोटिस के बाद सभी विभागों को निर्देश दिया गया था कि वे दिव्यांग प्रमाण पत्रों की जांच पूरी करें और 8 जनवरी, 2026 तक विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपें।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से सरकारी कर्मचारियों में जवाबदेही बढ़ेगी और फर्जी प्रमाण पत्रों के इस्तेमाल पर रोक लगेगी। साथ ही, यह पहल राज्य में दिव्यांग कल्याण योजनाओं के उचित लाभ वितरण के लिए भी अहम साबित होगी।

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Author: Shikha Bhardwaj

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