शिवसेना (उबाठा) नेता आदित्य ठाकरे ने महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उन्होंने राज्य निर्वाचन आयुक्त दिनेश वाघमारे से मुलाकात के बाद यह मुद्दा उठाया और आगाह किया कि यदि इन अनियमितताओं को ठीक नहीं किया गया तो विपक्ष सड़कों पर उतरेगा और अदालत का रुख भी करेगा। ठाकरे ने विशेष रूप से सुझाव और आपत्तियां उठाने के लिए मौजूदा सात दिन की अवधि को बढ़ाकर 21 दिन करने की मांग की है। आदित्य ठाकरे ने अपनी विधानसभा क्षेत्र वरली की मतदाता सूची में कथित विसंगतियों को लेकर एक प्रेजेंटेशन भी दिया था। उनके मुख्य आरोपों में शामिल हैं: 502 ऐसे मतदाता थे जिनके नाम और उनके पिता के नाम एक जैसे थे।

लगभग 4177 ऐसे मतदाताओं के पते थे जहाँ हाउस नंबर के आगे कुछ भी नहीं लिखा गया था, यानी हाउस नंबर ब्लैंक छोड़ दिया गया था। यह दावा किया गया कि मुंबई के एनएम जोशी मार्ग के पास अंबेडकर नगर में एक छोटे से घर में 38 मतदाता रजिस्टर्ड थे।
720 मतदाताओं के पिता का नाम किसी अन्य समुदाय से था, 133 मतदाताओं के पहचान पत्र संख्या के साथ दो-दो बार नाम थे, 643 मतदाताओं के नाम गलत लिंक के साथ दर्ज थे, और 113 मतदाता 100 वर्ष से ज्यादा उम्र के थे। ये आरोप बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव से ठीक पहले लगाए गए हैं, जिसके कारण राज्य की राजनीति गरमा गई है। आदित्य ठाकरे ने इन अनियमितताओं को वोट चोरी और लोकतंत्र का मजाक बताया है, जिसका लक्ष्य कथित तौर पर एक विशेष दल को लाभ पहुंचाना है।
हाराष्ट्र में मतदाताओं का पुनरीक्षण, जिसे निर्वाचन नामावली का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (Special Summary Revision – SSR) भी कहा जाता है, भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India – ECI) द्वारा मतदाता सूची को शुद्ध, समावेशी और अद्यतन बनाने के लिए किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण कार्य है। यह प्रक्रिया नियमित अंतराल पर चलाई जाती है और इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि मतदाता सूची में कोई त्रुटि न हो और कोई भी पात्र नागरिक मतदान करने से वंचित न रहे।
इस पुनरीक्षण के तहत, ऐसे नागरिक जो 1 जनवरी, 1 अप्रैल, 1 जुलाई, या 1 अक्टूबर को 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके हैं (संशोधित कानून के अनुसार वर्ष में चार अर्हक तिथियां), उन्हें मतदाता के रूप में पंजीकरण करने का अवसर मिलता है। इसके लिए फॉर्म-6 भरा जाता है। इसके अलावा, जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने हैं (जैसे निधन, निवास स्थान का परिवर्तन), उनके लिए फॉर्म-7 का उपयोग किया जाता है और विवरण में संशोधन या सुधार के लिए फॉर्म-8 भरा जाता है।
पूरी प्रक्रिया में आमतौर पर मसौदा सूची (Draft Roll) का प्रकाशन, दावे और आपत्तियां प्राप्त करने की अवधि, इन दावों और आपत्तियों का सत्यापन और निपटान, तथा अंत में मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन शामिल होता है। आयोग मतदाता सूची की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए बूथ स्तर के अधिकारियों (BLO) के माध्यम से गहन पुनरीक्षण गतिविधियों पर विशेष जोर देता है, जिसमें घर-घर सत्यापन भी शामिल हो सकता है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि मतदाता सूची में कोई भी ‘डुप्लीकेट’ नाम न हो, जिसके लिए क्षेत्रीय अधिकारी पते पर जाकर संबंधित मतदाताओं से संपर्क करते हैं और उनके विवरण की पुष्टि करते हैं। इस प्रकार, महाराष्ट्र में मतदाताओं का पुनरीक्षण आगामी चुनावों के लिए एक सटीक और अद्यतन मतदाता सूची तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।