इसरो अब पीएसएलवी रॉकेट के आधे विकास कार्य को निजी कंपनियों को सौंपेगा। इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने बताया कि एचएएल और एलएंडटी द्वारा बना पहला उद्योग-निर्मित रॉकेट फरवरी तक लॉन्च किया जाएगा।

निजी कंपनियां बनाएंगी 16 रॉकेट
इसरो प्रमुख ने बताया कि स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (एसएसएलवी) की तकनीक पहले ही एचएएल को 511 करोड़ रुपये के समझौते के तहत दी जा चुकी है। इसके जरिए निजी उद्योग अब 16 छोटे रॉकेट बनाएंगे। उन्होंने कहा कि पहले केवल तीन-चार स्टार्टअप अंतरिक्ष क्षेत्र में थे, लेकिन अब देश में 330 से अधिक स्टार्टअप इस दिशा में काम कर रहे हैं। साथ ही, लगभग 450 उद्योग इसरो के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
चंद्रमा की लैंडिग पर बोले इसरो प्रमुख
नारायणन ने कहा कि 23 अगस्त 2023 को भारत ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग कर इतिहास रचा। यह उपलब्धि हासिल करने वाला भारत दुनिया का पहला देश बना। उन्होंने मंगलयान मिशन को सटीकता का चमत्कार बताया, जो 600 मिलियन किलोमीटर की यात्रा कर 295 दिन बाद भी अपने इंजन को दोबारा शुरू करने में सफल रहा। उन्होंने कहा कि भारत ने अब तीन स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन भी तैयार कर लिए हैं, जो पहले विदेशी देशों से नहीं मिलते थे।
लॉन्चिंग क्षमता को बढ़ाने का लक्ष्य
इसरो प्रमुख ने बताया कि 29 जनवरी 2024 को इसरो ने अपनी 100वीं रॉकेट लॉन्च पूरी की, जो भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक सुनहरा अध्याय है। उन्होंने कहा कि एचसीएल और इसरो ने मिलकर 32-बिट का स्वदेशी कंप्यूटर प्रोसेसर बनाया है, जो भारत को इलेक्ट्रॉनिक तकनीक में आत्मनिर्भर बनाएगा। फिलहाल भारत के पास 56 उपग्रह काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य है कि अगले पांच वर्षों में देश की लॉन्चिंग क्षमता को बढ़ाकर साल में 50 तक किया जाए।
Author: planetnewsindia
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