दिल्ली में पटाखों पर प्रतिबंध लगाने की शुरुआत 2015 में तीन बच्चों की सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल की गई एक याचिका से हुई थी। बच्चों ने पटाखों के कारण अपने स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता जताई थी। इसके बाद लगातार सर्वोच्च न्यायालय में पटाखों पर प्रतिबंध को लेकर सुनवाई चलती रही और अंततः 2018 में पटाखों पर आंशिक प्रतिबंध लगा।

दिल्ली में पटाखों पर प्रतिबंध लगाने की शुरुआत 2015 में तीन बच्चों की सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल की गई एक याचिका से हुई थी। बच्चों ने पटाखों के कारण अपने स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता जताई थी। इसके बाद लगातार सर्वोच्च न्यायालय में पटाखों पर प्रतिबंध को लेकर सुनवाई चलती रही और अंततः 2018 में पटाखों पर आंशिक प्रतिबंध लगा। अदालत ने केवल हरित पटाखे चलाने की अनुमति दी।
लेकिन इस पूरे मामले के बीच दिल्ली में इस मामले पर जमकर राजनीति होती रही। भाजपा ने तत्कालीन आम आदमी पार्टी सरकार और अरविंद केजरीवाल पर पटाखों पर प्रतिबंध लगाने पर हिंदू विरोधी होने का आरोप लगाया। भाजपा का कहना था कि यदि अरविंद केजरीवाल सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में ठीक से पैरवी की होती तो दिल्ली में हिंदुओं के सबसे बड़े त्योहार दिवाली पर लोगों को आतिशबाजी से वंचित न रहना पड़ता। भाजपा पटाखों को चलाने को लेकर सदैव सकारात्मक रुख अपनाती रही।
हालांकि, इस राजनीति से इतर एक सच यह भी है कि सर्वोच्च अदालत से प्रतिबंध लगने के बाद भी दिल्ली में दिवाली की रात जमकर पटाखे चलते रहे। पटाखों के भंडारण, बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध होने के बाद भी दिवाली और छठ जैसे त्योहारों पर दिल्ली में जमकर आतिशबाजी होती रही। जगह-जगह पर पटाखों की बिक्री भी चलती रही। लोगों ने दूसरे शहरों से भी पटाखे मंगाकर दिवाली-छठ में खूब आतिशबाजी की। सोशल मीडिया में इसे हिंदुओं की जीत कहकर प्रचारित किया गया।
ग्रीन पटाखों के बारे में यही दावा किया जाता है कि इनसे प्रदूषण कम होता है। ये आवाज भी कम करते हैं जिससे ध्वनि प्रदूषण का स्तर नियंत्रण में रहता है। लेकिन कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रीन पटाखे सामान्य पटाखों की तुलना में कहीं ज्यादा हानिकारक होते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि ग्रीन पटाखे पीएम 2.5 और पीएम 10 से ज्यादा महीन कण निकालते हैं जो लोगों के लिए ज्यादा खतरनाक होते हैं। इसके अलावा, इस बात की भी पूरी संभावना होती है कि ग्रीन पटाखों को चलाने की अनुमति मिलने के बाद ग्रीन पटाखों में भी सामान्य रसायन उपयोग किए जाएं और इसके ग्रीन होने का कोई लाभ न हो। यानी ग्रीन पटाखे सामान्य पटाखों को चलाने के लिए चोर दरवाजे का काम कर सकते हैं।
बीएल कपूर अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. संदीप नायर ने अमर उजाला से कहा कि ग्रीन पटाखे अन्य पटाखों की तुलना में कुछ कम हानिकारक हो सकते हैं। लेकिन इसके बाद भी ये लोगों को गंभीर नुकसान कर सकते हैं और जितना संभव हो पटाखों के संपर्क और उपयोग में आने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लोग पहले ही सांस की किसी बीमारी, अस्थमा, फेफड़े संबंधी बीमारी या हार्ट-किडनी की बीमारी से पीड़ित हैं, उन्हें ग्रीन पटाखों से भी अधिक नुकसान होगा।
डॉ. संदीप नायर ने कहा कि इसी तरह गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए ग्रीन पटाखे भी बहुत नुकसानदायक होंगे। विशेषकर गर्भवती महिलाओं के लिए सांस लेने में परेशानी आ सकती है। इससे गर्भस्थ शिशु को भी परेशानी हो सकती है। बच्चों के शरीर और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होते हैं, ऐसे में बच्चों को ग्रीन पटाखों से अधिक परेशानी हो सकती है। इस परिस्थिति में लोगों को पटाखों के एक्सपोजर से बचने की कोशिश करनी चाहिए।
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि वे सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय का स्वागत करते हैं। बच्चों को अपने धर्म-संस्कृति के बारे में जानकारी होनी चाहिए और बच्चों को एक दिन के लिए खुशी मनाने का अधिकार मिलना चाहिए। सचदेवा ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण के कई कारण हैं जिन्हें दूर करने के लिए उनकी सरकार लगातार काम कर रही है और जल्द ही इस समस्या का समाधान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में एक ऐसी सरकार है जिसने लोगों के हितों की बात सर्वोच्च अदालत में सही तरीके से रखी जिसके कारण यह निर्णय आया। उन्होंने इस निर्णय का स्वागत किया।
Author: planetnewsindia
8006478914