सार
Sunjay Kapur Assets Row: करिश्मा कपूर के एक्स हसबैंड और बिजनेसमैन संजय कपूर के निधन को तीन महीने भी पूरे नहीं हुए कि उनकी संपत्ति पर विवाद शुरू हो गया है। विवाद है करिश्मा कपूर के बच्चों और संजय कपूर की दूसरी पत्नी प्रिया के बीच। करिश्मा के बच्चों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया कि प्रिया ने फर्जी वसीयत गढ़ी है। इन आरोपों पर अब प्रिया सचदेव कपूर ने चुप्पी तोड़ी है।

विस्तार
बिजनेसमैन संजय कपूर का 12 जून को लंदन में निधन हो गया। उन्हें दुनिया छोड़े तीन महीने भी नहीं हुए कि उनकी 30 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति पर विवाद छिड़ गया है और मामला कोर्ट में पहुंच गया है। एक तरफ करिश्मा कपूर के बच्चे संपत्ति में अपना हिस्सा मांग रहे हैं और इस संदर्भ में दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। वहीं, संजय कपूर की दूसरी पत्नी प्रिया और संजय की मां रानी अपना दावा ठोंक रही हैं। संजय कपूर की कथित वसीयत भी सामने आई है, जिस पर करिश्मा कपूर के बच्चों ने सवाल खड़े किए हैं। मामला हाईकोर्ट पहुंच चुका है और 9 अक्तूबर को इस पर अगली सुनवाई है। इस बीच कोर्ट ने संजय कपूर की दूसरी पत्नी प्रिया कपूर से संपत्ति के संबंध में ब्यौरा मांग लिया है। प्रिया ने दलील दी है साथ ही करिश्मा कपूर के बच्चों से सवाल किया है, ‘1900 करोड़ रुपये ले चुके और क्या चाहिए’?
‘करिश्मा के बच्चों को 1,900 करोड़ रुपये पहले ही मिल चुके’
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, दिवंगत बिजनेसमैन संजय कपूर की पत्नी प्रिया कपूर ने बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को सूचित किया कि उनकी पूर्व एक्स वाइफ करिश्मा कपूर के दोनों बच्चों को पारिवारिक ट्रस्ट से पहले ही 1,900 करोड़ रुपये मिल चुके हैं। प्रिया ने ‘उन्हें और क्या चाहिए’? दरअसल, करिश्मा के बच्चों ने दिवंगता पिता की 30 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति में हिस्सेदारी की मांग करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया और संजय कपूर वसीयत की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठाया है। बच्चों का आरोप है कि सौतेली मां प्रिया कपूर ने संपत्ति पर नियंत्रण पाने के लिए उसमें जालसाजी की।
क्या वसीयत पंजीकृत थी?
वहीं, प्रिया कपूर के वकील ने इन दावों का विरोध करते हुए ज्योति सिंह के समक्ष तर्क दिया। वकील ने कहा, ‘ऐसा नहीं है कि लोगों को सड़कों पर छोड़ दिया गया है’। वकील ने आगे कहा कि वसीयत पंजीकृत नहीं थी, लेकिन यह ‘अमान्य’ नहीं थी। बता दें कि वकील ने यह दलीलें न्यायाधीश के उस सवाल के जवाब में दी गईं, जिसमें पूछा गया कि क्या कथित वसीयत पंजीकृत थी’?


