Kurukshetra: आखिरकार शांत हुई मारकंडा, खतरे के निशान से 11 हजार क्यूसेक नीचे आया पानी का बहाव

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एक सप्ताह के दौरान ही मारकंडा का जलस्तर 36 हजार से भी ज्यादा पहुंच गया था और इसी वजह से शाहाबाद, इस्माईलाबाद व पिहोवा क्षेत्र में  करीब 60 हजार एकड़ फसल जलमग्न हो गई थी।

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करीब 15 दिनों तक अपना राैद्र रूप दिखाती रही मारकंडा नदी शांत हो गई है। नदी में सोमवार सुबह 7:30 बजे शाहाबाद में 14007 क्यूसेक पानी का बहाव दर्ज किया गया जो खतरे के निशान 25000 क्यूसेक से करीब 11 हजार क्यूसेक कम रहा।

इससे न केवल बाढ़ का दंश झेल रहे आसपास के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है बल्कि प्रशासन को भी बड़ी राहत मिली है। एक सप्ताह के दौरान ही मारकंडा का जलस्तर 36 हजार से भी ज्यादा पहुंच गया था और इसी वजह से शाहाबाद, इस्माईलाबाद व पिहोवा क्षेत्र में  करीब 60 हजार एकड़ फसल जलमग्न हो गई थी। वहीं गांव कठवा, तगौर, अजमतपुर शहीद कई गांव भी बाढ़ की चपेट में आ गए थे।

मारकंडा शांत हुई तो पानी भी उतरने की उम्मीद जगी है। हालांकि जल भराव से अभी बड़े स्तर पर किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है लेकिन अब धीरे-धीरे हालत सुधारने की उम्मीद की जाने लगी है। उधर इस्माईलाबाद के गांव नैंसी के पास टूटे एक तटबंध को दुरुस्त किए जाने का अधिकतर काम पूरा हो गया है तो आज दोपहर बाद दूसरे तटबंध को भी दुरुस्त करने का काम शुरू किया जाएगा। हालांकि दीवार टूटने से बीबीपुर झील में अभी पानी का बहाव तेज है लेकिन मारकंडा में पानी होने के चलते शाम तक यहां भी कुछ राहत मिल सकेगी।

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