छिंदवाड़ा ज़िले के पांढुर्ना क्षेत्र का छोटा सा आदिवासी गांव देवनाला रैयत इन दिनों पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां के ग्रामीणों ने सामूहिक निर्णय लेकर गांव को पूरी तरह शराब मुक्त करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है।

कड़े नियम लागू
गांव की बैठक में तय हुआ कि अब कोई भी व्यक्ति शराब बनाएगा या बेचेगा तो उस पर ₹50,000 का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, नशे की हालत में पकड़े जाने वाले लोगों से ₹500 का दंड वसूला जाएगा। यह नियम पूरे गांव के लिए अनिवार्य किए गए हैं।
क्यों उठाया कदम
बीते कुछ वर्षों में गांव में शराबखोरी की आदत ने परिवारों का माहौल बिगाड़ दिया था। युवाओं की लत के चलते झगड़े बढ़ने लगे और महिलाओं-बच्चों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। इस स्थिति से तंग आकर ग्रामीणों ने कहा – अब बहुत हो गया।
मिलकर तोड़ी शराब की भट्टियां
ग्रामीण नेताओं मेदिनेश उईके, देवराम भलावी, अनिल मर्सकोले, देवीलाल तुमड़ाम, पूनाजी तड़ाम, संपीलाल उईके और गणेश उईके की अगुवाई में हुई पंचायत में सभी ने एकजुट होकर शराबबंदी का समर्थन किया। बैठक के बाद गांववालों ने नाले और जंगल में चल रही अवैध भट्टियों को खुद ही ध्वस्त कर दिया।
यह पहल गांव को नशे की गिरफ्त से आज़ाद कराने के साथ-साथ अगली पीढ़ी के लिए स्वस्थ और सुरक्षित माहौल तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।