लखनऊ (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारियों के हित में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के गठन को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिससे राज्य के करीब 5 लाख आउटसोर्स कर्मियों को सीधा लाभ मिलेगा।

🧾 नई व्यवस्था की प्रमुख बातें:
- अब आउटसोर्स कर्मियों को तीन साल का अनुबंध मिलेगा, जिसे बाद में रिन्यू किया जा सकेगा।
- न्यूनतम वेतन ₹20,000 प्रति माह तय किया गया है, जो पहले लगभग ₹10,000 था।
- वेतन सीधे 1 से 5 तारीख के बीच खातों में ट्रांसफर होगा।
- कर्मचारियों को EPF और ESIC की सुविधा मिलेगी।
🏢 निगम के गठन का उद्देश्य:
- आउटसोर्स एजेंसियों की अनियमितताओं को खत्म करना।
- कर्मचारियों को पूरा मानदेय, बीमा और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना।
- निगम के माध्यम से जेम पोर्टल पर पारदर्शी एजेंसी चयन होगा।
📋 चयन प्रक्रिया और आरक्षण:
- भर्ती लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के माध्यम से होगी।
- SC, ST, OBC, EWS, दिव्यांगजन, महिलाओं और पूर्व सैनिकों को आरक्षण का लाभ मिलेगा।
- महिलाओं को मैटरनिटी लीव भी दी जाएगी।
💼 सेवा श्रेणियाँ और न्यूनतम पारिश्रमिक:
| श्रेणी | सेवा प्रकार | न्यूनतम वेतन |
|---|---|---|
| श्रेणी 1 | चिकित्सीय, अभियंत्रण, परियोजना प्रबंधन | ₹40,000 |
| श्रेणी 2 | नर्सिंग, फार्मेसी, कला शिक्षण, डाटा प्रोसेसिंग | ₹25,000 |
| श्रेणी 3 | टंकण, फोटोग्राफी, वाहन चालन, पैरामेडिकल | ₹22,000 |
| श्रेणी 4 | लिफ्ट ऑपरेटर, खान-पान, सुरक्षा, सफाई | ₹20,000 |
🛡️ कर्मचारी हितों की सुरक्षा:
- सेवा के दौरान मृत्यु पर ₹15,000 अंतिम संस्कार सहायता दी जाएगी।
- अनुशासनहीनता या अनियमितता की स्थिति में निगम की सहमति से सेवा समाप्त की जा सकेगी।
- निगम को 1% सर्विस चार्ज मिलेगा, शेष राशि वेलफेयर फंड में जमा होगी।