तिवारी को धोनी के फैसले से ठेस पहुंची है और उनका मानना है कि उनके अच्छे प्रदर्शन के बावजूद उन्हें अपने समकालीन खिलाड़ियों जितना समर्थन और मौके नहीं मिले।

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भारतीय टीम के पूर्व बल्लेबाज मनोज तिवारी ने अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान अपने संघर्ष को याद किया और महेंद्र सिंह धोनी पर निशाना साधते हुए कहा कि यह पूर्व भारतीय कप्तान उन्हें पसंद नहीं करता था। तिवारी ने भारत के लिए आखिरी मैच जुलाई 2015 में जिम्बाब्वे के खिलाफ खेला था। उनका मानना है कि उन्हें तत्कालीन कप्तान धोनी और प्रबंधन का उतना समर्थन नहीं मिला और अपने अच्छे ऑलराउंड प्रदर्शन के कारण उन्हें भारत के लिए खेलने के अधिक अवसर मिल सकते थे।
तिवारी ने वेस्टइंडीज के खिलाफ जड़ा था शतक
वेस्टइंडीज के 2011 में भारत दौरे के दौरान तिवारी ने पांचवें वनडे मैच में शतक लगाया था जिससे भारत यह सीरीज 4-1 से जीतने में सफल रहा था। इसके बाद उन्होंने जुलाई 2012 में वनडे मैच खेला जहां उन्होंने चार विकेट लिए जिससे भारत श्रीलंका को छह विकेट से हराने में सफल रहा। तिवारी का आरोप है कि लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद उन्हें कभी धोनी का साथ नहीं मिला जो कुछ अन्य खिलाड़ियों का हमेशा समर्थन करते थे।
वेस्टइंडीज के 2011 में भारत दौरे के दौरान तिवारी ने पांचवें वनडे मैच में शतक लगाया था जिससे भारत यह सीरीज 4-1 से जीतने में सफल रहा था। इसके बाद उन्होंने जुलाई 2012 में वनडे मैच खेला जहां उन्होंने चार विकेट लिए जिससे भारत श्रीलंका को छह विकेट से हराने में सफल रहा। तिवारी का आरोप है कि लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद उन्हें कभी धोनी का साथ नहीं मिला जो कुछ अन्य खिलाड़ियों का हमेशा समर्थन करते थे।
तिवारी ने एक स्पोर्ट्स वेबसाइट से कहा, धोनी को हर कोई पसंद करता है और जाहिर है कि उन्होंने समय के साथ अपनी नेतृत्व क्षमता से इसे साबित भी किया है। मैं हमेशा कहता हूं कि उनकी नेतृत्व क्षमताएं बहुत अच्छी थीं। लेकिन मेरे मामले में, मुझे नहीं पता। मुझे लगता है कि उस समय कुछ ऐसे लोग थे जिन्हें वह सचमुच पसंद करते थे और जिनका उन्होंने पूरा समर्थन किया था। बहुत से लोग जानते हैं, लेकिन हर कोई आगे आकर इसके बारे में बात नहीं करता। इसलिए क्रिकेट में हर जगह एक बहुत ही गहरी पसंद और नापसंद होती है। इसलिए मैं मानता हूं कि मैं किसी एक को पसंद नहीं करता। हो सकता है, वह मुझे पसंद नहीं करता था।
धोनी के फैसले से तिवारी को पहुंची ठोस
तिवारी को धोनी के फैसले से ठेस पहुंची है और उनका मानना है कि उनके अच्छे प्रदर्शन के बावजूद उन्हें अपने समकालीन खिलाड़ियों जितना समर्थन और मौके नहीं मिले। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि धोनी, डंकन फ्लेचर और चयनकर्ता ही इसका जवाब दे पाएंगे क्योंकि अभी तक मुझे कोई जवाब नहीं मिला है। इसके अलावा मैं ऐसा व्यक्ति नहीं हूं जो कोच, चयनकर्ताओं या उस समय के कप्तान को फोन करके इस सवाल का जवाब दूं लेकिन मैंने पहले भी कहा है कि जब भी मैं धोनी से मिलूंगा, तो उनसे जरूर पूछूंगा कि शतक बनाने के बाद भी मुझे मौका न दिए जाने के मुख्य कारण क्या थे।
तिवारी को धोनी के फैसले से ठेस पहुंची है और उनका मानना है कि उनके अच्छे प्रदर्शन के बावजूद उन्हें अपने समकालीन खिलाड़ियों जितना समर्थन और मौके नहीं मिले। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि धोनी, डंकन फ्लेचर और चयनकर्ता ही इसका जवाब दे पाएंगे क्योंकि अभी तक मुझे कोई जवाब नहीं मिला है। इसके अलावा मैं ऐसा व्यक्ति नहीं हूं जो कोच, चयनकर्ताओं या उस समय के कप्तान को फोन करके इस सवाल का जवाब दूं लेकिन मैंने पहले भी कहा है कि जब भी मैं धोनी से मिलूंगा, तो उनसे जरूर पूछूंगा कि शतक बनाने के बाद भी मुझे मौका न दिए जाने के मुख्य कारण क्या थे।
तिवारी धोनी की नेतृत्व क्षमता का सम्मान करते हैं, लेकिन उनका मानना है कि अगर उन्हें उस दौर में कुछ अन्य खिलाड़ियों जैसा समर्थन मिलता, तो उनका करियर बिल्कुल अलग दिशा में जा सकता था। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें धोनी से वैसा ही समर्थन मिला जैसा कई अन्य खिलाड़ियों को मिला? तो तिवारी ने अपने अनुभव के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने कहा, बहुत से खिलाड़ी ऐसे हैं जो धोनी के अपने खिलाड़ियों के समर्थन के तरीके से अलग राय रखते हैं। मेरे अनुभव में मैं सिर्फ अपना अनुभव बता सकता हूं, मेरे साथ क्या हुआ है। अगर उन्होंने सचमुच अपने खिलाड़ियों का समर्थन किया होता, तो उन्होंने मेरा भी जरूर समर्थन करना चाहिए था, क्योंकि मैंने उस खास मैच में और समय के साथ अच्छा प्रदर्शन किया था।