आगमन गेस्ट हाउस की जमीन कब्जाने के मामले की जांच में खुलासा हुआ। अखिलेश दुबे ने कोर्ट को भी गुमराह किया था।

अधिवक्ता अखिलेश दुबे ने सुप्रीम कोर्ट तक को गुमराह करने की कोशिश की है। इस बात का खुलासा आगमन गेस्ट हाउस पर कब्जे की जांच कर रही पुलिस की कार्रवाई के दौरान हुआ है। डीसीपी सेंट्रल श्रवण कुमार सिंह के मुताबिक अखिलेश पक्ष ने 2012 में सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी कि आगमन गेस्ट हाउस वाली जमीन पर प्रभावती देवी का कब्जा है जबकि वर्ष 2010 में ही प्रभावती देवी की मृत्यु हो गई थी। जब सामने वाले पक्ष के वकील ने इसका प्रमाण पत्र दाखिल किया तो आरोपियों ने पैरवी ही छोड़ दी थी।
डीसीपी के अनुसार, वर्ष 2002 में अखिलेश पक्ष के लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका संख्या 3486 दायर की थी। इसमें छह लोगों का भूमि संख्या 13/388 पर कब्जा होने की बात कही थी जबकि पुलिस की जांच में उजागर हुआ है कि वर्ष 2001 में ही दबंगई कर सभी छह परिवारों को जमीन से बेदखल कर दिया था। आरोपियों ने 29 जुलाई 2009 को एक रजिस्टर्ड पट्टा किया था। इसे 24 फरवरी 2016 में निरस्त कर दो दिन बाद 26 फरवरी को रजिस्टर्ड पट्टा सर्वेश दुबे एवं मेसर्स केनरी अपेरल्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम कर दिया।

पॉवर ऑफ अटार्नी के नियमों का पालन नहीं हुआ
पुलिस अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2005 के नियमों के अनुसार पॉवर ऑफ अटार्नी ब्लड रिलेशन में ही की जा सकती है। या बहुत आवश्यक परिस्थितियों में अन्य विकल्प अपना सकते हैं। हालांकि इस मामले में पूरी तरह नियमों का विचलन किया गया है। साथ ही पुलिस इस मामले में अखिलेश की बेटी सौम्या जिसे दस्तावेजों में पंच दर्शाया गया है उसकी भूमिका की भी जांच की जा रही है।