Shravasti: सड़क दुर्घटना में बाइकों की आमने-सामने से भिड़ंत, एक की मौत, दूसरा घायल

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श्रावस्ती में बुधवार सुबह दो बाइकों की आमने-सामने भिड़ंत हो गई। इसमें एक अधेड़ की मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिनगा भेज दिया है।

Two bikes collided head-on road accident one dead another injured

इकौना विशेश्वरगंज मार्ग स्थित भवानीपुर बनकट में शिव मंदिर के सामने बुधवार को दो बाइकों की आमने सामने भिड़ंत हो गई। घटना में जहां एक बाइक सवार की मौत हो गई। वहीं, दूसरे बाइक पर सवार गंभीर रूप से घायल हो गया। सूचना पर पहुंची इकौना पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

बलरामपुर जिले के ग्राम हंसुवाडोल निवासी रामकरन उर्फ राम कन्ने चौहान (32) पुत्र बुधराम चौहान बहराइच के विशेश्वरगंज क्षेत्र के गोसाई पुरवा गांव के मजरा भवानीपुर बनकटअपनी ससुराल गया था। वहां आयोजित मांगलिक कार्यक्रम में शामिल होकर बुधवार सुबह बाइक से कहीं निकला था। वहीं, सामने से बहराइच जिले के पयागपुर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम लोहारन पुरवा बसनेरा निवासी कल्पराम विश्वकर्मा (42) अपनी ससुराल वीरपुर के छब्बा पुरवा से भंडारा खाकर वापस लौट रहा था। इन दोनों बाइकों की भवानीपुर बनकट स्थित शिव मंदिर के निकट आमने सामने भिड़ंत हो गई।

घटना में दोनों बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गए। आनन फानन में दोनों को एंबुलेंस से सीएचसी इकौना पहुंचाया गया। यहां चिकित्सकों ने राम करन को मृत घोषित कर दिया। कल्पराम का इलाज चल रहा है।

चिकित्सक की सूचना पर पहुंचे इकौना कस्बा प्रभारी विशाल यादव ने शव को कब्जे में लेकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भिनगा भेज दिया है। वहीं मौत की सूचना के बाद पहुंचे परिजनों का रो रो कर हाल बेहाल है।

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Author: planetnewsindia

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सबसे ज्यादा पड़ गई

संजय भाटिया ने लोकसभा चुनाव में रचा था इतिहास संजय भाटिया कुरुक्षेत्र विश्वविद्याल ग्रेजुएट हैं। इनका जन्म हरियाणा के पानीपत जिले में हुआ है। वह भाजपा के महामंत्री भी रह चुके हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी संजय भाटिया ने अपने पहले ही लोकसभा चुनाव में इतिहास रच दिया था। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को 6.54 लाख मतों के अंतर से मात दी थी। संजय भाटिया ने प्रदेश के 53 साल के इतिहास में सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी। उन्हें कुल 909432 वोट मिले थे। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी कुलदीप शर्मा को 654269 वोटों के अंतर से हराया था। राहुल गांधी ने दिया था कर्मवीर के नाम का सुझाव वहीं कर्मवीर सिंह बौद्ध किसी भी गुट या खेमे से जुड़े हुए नेता नहीं माने जाते। यही कारण है कि उन्हें संगठन के भीतर एक संतुलित और सर्व स्वीकार्य चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। वे ‘संविधान बचाओ अभियान’ में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं और जमीनी स्तर पर पार्टी के कार्यक्रमों में भागीदारी निभाते रहे हैं। एससी समुदाय से आने वाले कर्मवीर सिंह बौद्ध सामाजिक संतुलन के नजरिये से भी एक अहम दावेदार है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने स्वयं उनके नाम का सुझाव दिया है। अंबाला के मुलाना विधानसभा में रहने वाले कर्मवीर सिंह प्रशासकीय अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं और लंबे समय से कांग्रेस से जुड़कर कार्य कर रहे थे। कांग्रेस ने उन्हें हिमाचल प्रदेश में एससी सेल का प्रभारी भी बनाया था। राष्ट्रीय स्तर पर वह कन्वीनर भी हैं।