
Kanpur News: क्राइम ब्रांच ने युवतियों से पूछा कि उन्होंने कितने लोगों से ठगी को अंजाम दिया है। इस पर वो बोली कि उन्हें गिनती याद नहीं है। उन्हें जो हरिओम करने को कहता था, वो लोग वही करते थे।
कानपुर में विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर सवा लाख लोगों से ठगी के मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पूछताछ के दौरान गिरफ्तार की गई युवतियाें ने बताया कि वह खुद नौकरी.कॉम पर नौकरी की तलाश कर रही थीं। मगर समय के साथ खुद साइबर ठग बन बैठी। पुलिस गैंग के फरार 11 अन्य सदस्यों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है। गैंग में कई अन्य युवतियों के शामिल होने की भी बात सामने आई है।
कानपुर में विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर सवा लाख लोगों से ठगी के मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पूछताछ के दौरान गिरफ्तार की गई युवतियाें ने बताया कि वह खुद नौकरी.कॉम पर नौकरी की तलाश कर रही थीं। मगर समय के साथ खुद साइबर ठग बन बैठी। पुलिस गैंग के फरार 11 अन्य सदस्यों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है। गैंग में कई अन्य युवतियों के शामिल होने की भी बात सामने आई है।
दोनों ने नौकरी के लिए अपना रिज्यूम हरिओम की फर्जी वेबसाइट पर एचआर को भेज दी थी। दोनों का प्रोफाइल देखने के बाद हरिओम पांडेय ने उन्हें 30 हजार प्रतिमाह पर नौकरी दे दी थी। ठगी की जानकारी होने के बाद भी दोनों युवतियां हरिओम पांडेय के साथ जुड़ी रही और काम करती रही। क्राइम ब्रांच ने युवतियों से पूछा कि उन्होंने कितने लोगों से ठगी को अंजाम दिया है। इस पर वो बोली कि उन्हें गिनती याद नहीं है। उन्हें जो हरिओम करने को कहता था, वो लोग वही करते थे।
पीड़ित विकास से जिस नंबर से जालसाज संपर्क में थे वो बदायूं के एक युवक के नाम पर निकला। पुलिस ने जब उससे संपर्क किया तो पता चला कि उसने थाने में मोबाइल गुम होने तहरीर दी थी। तीन से चार कंपनियों में इसी तरह से फर्जी नंबर पंजीकृत थे और उन्हीं में पैसे मंगाए जाते थे।
पूछताछ में आरिबा और कीर्ति ने बताया कि उनकी तरह शहर की 11 और महिलाएं व युवतियां विदेश में नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को ठगने के लिए कॉल करती हैं। उन्होंने मोबाइल नंबर भी क्राइम ब्रांच को दिए हैं। टीम ने जब मोबाइल नंबर की लोकेशन निकाली तो वह नंबर चमनगंज, बाबूपुरवा, किदवई नगर, ग्वालटोली, मेस्टन रोड समेत शहर के कई अन्य हिस्सों में सक्रिय मिले। मंगलवार की दोपहर सभी मोबाइल नंबर बंद मिले। मोबाइल नंबरों की जांच की गई तो पता चला कि सभी फर्जी तरीके से दूसरे प्रदेशों से जारी हुए हैं। क्राइम ब्रांच की एक टीम शातिरों के पास मिले अकाउंट नंबर के आधार पर विभिन्न बैंकों से डेटा एकत्रित करने में जुटी है।
गिरोह का सरगना हरिओम और अनुराग सबसे पहले रजिस्ट्रेशन का पैसा जमा कराते थे। इसके बाद वेरीफिकेशन के नाम पर 50 से 70 हजार रुपये, फिर ऑफर लेटर के नाम पर एक लाख रुपये तक वसूलते थे। रुपये लेने के बाद फिर आवेदक की कॉल रिसीव नहीं करते थे। सूत्रों ने बताया कि इन लोगों ने व्हॉट्सएप पर डिसएपियर का ऑप्शन लगा रखा था जिसके चलते कुछ समय बाद चैट स्वत: डिलीट हो जाती थी।
ठग तीन चरणों में काम करते थे। पहले चरण में गिरोह का सरगना हरिओम नौकरी. कॉम से विदेश जाने वालों का डाटा फोन करने वाली युवतियों को देता था। इसके बाद वह लोगों से बात करके झांसे में लेती थी। इसके एवज में उन्हें 10 हजार रुपये दिया जाता था। दूसरे चरण में कीर्ति और आरिबा बात करती थीं जो संबंधित कंपनी में जॉब का ऑफर देते हुए रजिस्ट्रेशन कराने को राजी करती थी। इसके एवज में उन्हें 30 हजार रुपये मिलते थे। तीसरे चरण में गिरोह का सरगना और उसका साथी अनुराग लोगों से बात करते रजिस्ट्रेशन, सत्यापन व ऑफर लेटर के नाम रुपये वसूलता था।
Author: planetnewsindia
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