Bihar: ओपीडी से डॉक्टर नदारद, घंटों इंतजार के बाद भी नहीं मिलता कोई; सदर अस्पताल में अव्यवस्था से मरीज परेशान

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Bihar: सदर अस्पताल में इमरजेंसी सेवा 24 घंटे उपलब्ध रहती है, जबकि ओपीडी सेवा सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक संचालित होती है। हालांकि, मरीजों का कहना है कि डॉक्टर अक्सर 10 बजे के बाद ही ओपीडी में पहुंचते हैं, जिससे मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता है।

Patients are troubled by the chaos in Khagaria Sadar Hospital

खगड़िया सदर अस्पताल जिले का सबसे बड़ा अस्पताल होने के बावजूद अव्यवस्था का शिकार है। ओपीडी में डॉक्टरों की अनुपस्थिति से मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सोमवार को भी यही स्थिति बनी रही ओपीडी के बाहर मरीजों की भीड़ जमा रही, लेकिन डॉक्टर नदारद थे। अव्यवस्था के बीच सुरक्षा गार्डों को मरीजों को धक्का देते देखा गया, जिससे स्थिति और बिगड़ गई।

घंटों इंतजार के बाद भी नहीं मिला इलाज
बछौता के 52 वर्षीय वृद्ध मरीज ने बताया कि वह करीब एक घंटे से डॉक्टर के इंतजार में खड़े हैं, लेकिन डॉक्टर बाहर घूमने चले गए हैं। रांको से आई एक महिला ने कहा कि ओपीडी के बाहर इतनी भीड़ है कि महिलाओं को आगे बढ़ने में भी दिक्कत हो रही है।

सुबह 8 बजे शुरू होती है ओपीडी, लेकिन डॉक्टर आते हैं देरी से
सदर अस्पताल में इमरजेंसी सेवा 24 घंटे उपलब्ध रहती है, जबकि ओपीडी सेवा सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक संचालित होती है। हालांकि, मरीजों का कहना है कि डॉक्टर अक्सर 10 बजे के बाद ही ओपीडी में पहुंचते हैं, जिससे मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन लापरवाह डॉक्टरों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है।

बैठने की व्यवस्था भी नाकाफी
रोजाना 700 से 800 मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें फर्श पर बैठने को मजबूर होना पड़ता है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीजों को कतार में लगाने के लिए सुरक्षा गार्डों को तैनात किया गया है, और यदि वे अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा रहे हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। वहीं, ओपीडी में डॉक्टरों की देरी पर अस्पताल प्रबंधन ने इसे सिविल सर्जन के अधिकार क्षेत्र का मामला बताया। सदर अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्था मरीजों के लिए गंभीर समस्या बनती जा रही है। अगर प्रशासन जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाता है, तो मरीजों की परेशानी और बढ़ सकती है।

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Author: planetnewsindia

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सबसे ज्यादा पड़ गई

संजय भाटिया ने लोकसभा चुनाव में रचा था इतिहास संजय भाटिया कुरुक्षेत्र विश्वविद्याल ग्रेजुएट हैं। इनका जन्म हरियाणा के पानीपत जिले में हुआ है। वह भाजपा के महामंत्री भी रह चुके हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी संजय भाटिया ने अपने पहले ही लोकसभा चुनाव में इतिहास रच दिया था। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को 6.54 लाख मतों के अंतर से मात दी थी। संजय भाटिया ने प्रदेश के 53 साल के इतिहास में सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी। उन्हें कुल 909432 वोट मिले थे। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी कुलदीप शर्मा को 654269 वोटों के अंतर से हराया था। राहुल गांधी ने दिया था कर्मवीर के नाम का सुझाव वहीं कर्मवीर सिंह बौद्ध किसी भी गुट या खेमे से जुड़े हुए नेता नहीं माने जाते। यही कारण है कि उन्हें संगठन के भीतर एक संतुलित और सर्व स्वीकार्य चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। वे ‘संविधान बचाओ अभियान’ में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं और जमीनी स्तर पर पार्टी के कार्यक्रमों में भागीदारी निभाते रहे हैं। एससी समुदाय से आने वाले कर्मवीर सिंह बौद्ध सामाजिक संतुलन के नजरिये से भी एक अहम दावेदार है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने स्वयं उनके नाम का सुझाव दिया है। अंबाला के मुलाना विधानसभा में रहने वाले कर्मवीर सिंह प्रशासकीय अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं और लंबे समय से कांग्रेस से जुड़कर कार्य कर रहे थे। कांग्रेस ने उन्हें हिमाचल प्रदेश में एससी सेल का प्रभारी भी बनाया था। राष्ट्रीय स्तर पर वह कन्वीनर भी हैं।