अफसरों का दावा है कि इस गेहूं की भी जांच की गई थी। जांच रिपोर्ट जारी होने के बाद ही वितरण शुरू कराया गया था। लेकिन या तो जांच हुई ही नहीं या फिर किसी एक बोरी से दस पांच दाने निकालकर चेक कर लिए गए।
अलीगढ़ जनपद में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत राशन की दुकानों से बंटने के लिए आए गेहूं की पहले पंजाब और हरियाणा में जांच हुई। रैक पहुंचने पर फिर एफसीआई की टीम ने भी क्वालिटी जांची। अलीगढ़ में भी खाद्य और वितरण से जुड़े लोगों ने परीक्षण किया। सभी ने क्वालिटी जांच में गेहूं को बेहतर बताया । लेकिन जब यही गेहूं बंटा तो इसमें फफूंद और घुन लगा हुआ था। प्रशासन ने आनन-फानन में इसके वितरण पर रोक लगा दी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब क्वालिटी परीक्षण किया था तब गेहूं में घुन क्यों नहीं दिखा। अब जांच पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
अफसरों का दावा है कि इस गेहूं की भी जांच की गई थी। जांच रिपोर्ट जारी होने के बाद ही वितरण शुरू कराया गया था। लेकिन या तो जांच हुई ही नहीं या फिर किसी एक बोरी से दस पांच दाने निकालकर चेक कर लिए गए। अफसरों की इसी लापरवाही के कारण 135 दुकानों से खराब गेहूं का वितरण कार्ड धारकों को कर दिया गया। करीब 30 हजार कार्ड धारकों के घरों तक यह घुन लगा गेहूं पहुंच गया है।
डीएम बोले- गेहूं के आने से लेकर वितरण तक की जांच होगी
गेहूं की जांच में कहां रह जाती है कमी
जिले में राशन की दुकानों पर वितरण के लिए आने वाले गेहूं की जांच में कहां पर कमी रह जाती हैं, इस संबंध में राशन ठेकेदार संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष विजय विक्रम बताते हैं कि नियमानुसार एफसीआई द्वारा गेहूं पहले रेलवे के गोदाम पर आएगा। यहां से एफसीआई के गोदाम पर पहुंचेगा। यहां पर रीजनल मैनेजर गेहूं की जांच करेंगे। इसके बाद गेहूं ठेकेदारों तक पहुंचेगा। यहां से राशन की दुकानों पर पहुंचेगा।
स्थिति यह है
- अधिकांश मामलों में एफसीआई रेलवे के माल गोदाम से ही ठेकेदारों तक गेहूं की खेप पहुंचा देती है। जो बचता है उसे गोदामों तक पहुंचा दिया जाता है। इससे लाखों रुपया भाड़े का बच जाता है।
- लगातार इसी क्रम के बने रहने से गोदाम में पड़ा गेहूं लंबे समय तक पड़ा रहता है और उसकी गुणवत्ता बिगड़ने की संभावना बन जाती है।
- जब गुणवत्ता बिगड़ने की स्थिति बन जाती है तो एफसीआई उसे आननफानन राशन ठेकेदारों को आपूर्ति करता है।
Author: planetnewsindia
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