आगरा के पेठा फैक्टरी के श्रमिक की 13 वर्षीय बेटी राखी ने जूना अखाड़े में दीक्षा ली। वे साध्वी बन गईं, जिसके बाद वहां से उन्हें नया नाम मिला। लेकिन उन्हें कम उम्र की वजह से महाकुंभ से घर वापस भेज दिया गया।

प्रयागराज में महाकुंभ से पहले टरकपुरा गांव की राखी जूना अखाड़े की दीक्षा लेकर साध्वी बन गई है। पेठा फैक्टरी के श्रमिक की बेटी राखी ने डौकी और कुंडौल में पढ़ाई की है। साध्वी बनी राखी के परिजनों में इससे खुशी का माहौल है।
प्रयागराज में महाकुंभ से पहले टरकपुरा गांव की राखी जूना अखाड़े की दीक्षा लेकर साध्वी बन गई है। पेठा फैक्टरी के श्रमिक की बेटी राखी ने डौकी और कुंडौल में पढ़ाई की है। साध्वी बनी राखी के परिजनों में इससे खुशी का माहौल है।
दादी राधा देवी ने बताया कि राखी सिर्फ पढ़ाई और पूजा पाठ पर ही ध्यान देती थी। राखी के पिता संदीप उर्फ दिनेश ने बताया कि पुत्री राखी ने कक्षा एक से तीन तक कानपुर में अपने मामा के यहां पढ़ाई की थी। कक्षा 4 से 7 तक महादेव इंटर कॉलेज डौकी में पढ़ाई करने के बाद कक्षा 7 से 9 तक कुंडौल के स्प्रिंगफील्ड इंटर कॉलेज में पढ़ाई की है। राखी शुरू से ही भक्ति में लीन रहने लगी। बहुत कम बोलती है।
स्कूल से आकर खाना पीना खाकर अपने पूजा पाठ में लग जाती थी। सभी लोग प्रयागराज में 20 दिसंबर को गए थे। अचानक से बेटी राखी के मन में भक्ति जागृत हुई और अपनी स्वेच्छा से महाकुंभ जूना अखाड़े में दीक्षा लेकर शामिल हो गई। परिवार के लोगों ने काफी समझाया, लेकिन उसने मना कर दिया। राखी की मां रीमा सिंह धाकरे घरेलू महिला हैं।