
केंद्र सरकार ने स्वच्छता अभियान के तहत शहरों के बीच प्रतियोगिता को और व्यावहारिक बनाने के लिए टॉप शहरों के लिए अलग कैटेगरी बनाने की घोषणा की है। इसके तहत इंदौर और सूरत जैसे शहर जो अक्सर टॉप में ही रहते हैं उनका अलग श्रेणी में मुकाबला होगा। इसके अलावा इस बार स्वच्छता पखवाड़े में 2.60 लाख स्थानों को चयनित कर साफ करने का लक्ष्य रखा गया है।
स्वच्छता पखवाड़े में 2.60 लाख स्थानों की सफाई
17 सितंबर से दो अक्टूबर तक चलने वाले स्वच्छता पखवाड़े से जुड़े आयोजनों की जानकारी देते हुए मनोहर लाल ने कहा कि नई प्रणाली में शहरों के लिए गोल्डन सिटी क्लब में आने का और पहले से इस श्रेणी में शामिल शहर को खराब प्रदर्शन पर सामान्य श्रेणी में जाने का प्रविधान होगा। मनोहर लाल ने यह भी बताया कि इस बार स्वच्छता पखवाड़े में 2.60 लाख स्थानों को चयनित कर साफ करने का लक्ष्य रखा गया है।दस साल में 3.4 करोड़ घर बने ओडीएफ प्लस
पाटिल ने कहा कि स्वच्छता अभियान के दस सालों में गांवों में 3.4 करोड़ घर ओडीएफ प्लस बन गए हैं। ओडीएफ और ओडीएफ प्लस गांवों में परिवारों ने हर साल औसतन पचास हजार रुपये स्वास्थ्य खर्चों में बचाए हैं। डब्लूएचओ ने माना है कि 2019 में 2014 के मुकाबले डायरिया के कारण मरने वाले लोगों में तीन लाख की कमी वास्तव में स्वच्छता अभियान की देन है।
Author: planetnewsindia
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