केरल हाईकोर्ट ने सबरीमाला और मलिकप्पुरम मंदिर के मेलशांति चयन मामले में 56 वर्षीय राजीव एमपी को राहत दी है। कोर्ट ने उन्हें 7 अक्तूबर को होने वाले इंटरव्यू में अस्थायी रूप से शामिल होने की अनुमति दी। राजीव को देवस्वोम बोर्ड ने अयोग्य घोषित किया था।

केरल हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने सबरीमाला श्री धर्मसथा मंदिर और मलिकप्पुरम मंदिर के ‘मेलसंथी’ के चयन में भाग लेने से त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड की ओर अयोग्य घोषित किए गए एक उम्मीदवार को साक्षात्कार प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति दे दी है।
कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
जस्टिस राजा विजयराघवन वी और के वी जयकुमार की बेंच ने एक अंतरिम आदेश जारी किया। इसमें 56 वर्षीय राजीव एम पी को इस साल सबरीमाला-मलिकप्पुरम देवस्वोम के लिए मेलशांति (मुख्य पुजारी) चुनने के लिए 7 अक्तूबर को होने वाले इंटरव्यू में अस्थायी रूप से शामिल होने की अनुमति दी।
जस्टिस राजा विजयराघवन वी और के वी जयकुमार की बेंच ने एक अंतरिम आदेश जारी किया। इसमें 56 वर्षीय राजीव एम पी को इस साल सबरीमाला-मलिकप्पुरम देवस्वोम के लिए मेलशांति (मुख्य पुजारी) चुनने के लिए 7 अक्तूबर को होने वाले इंटरव्यू में अस्थायी रूप से शामिल होने की अनुमति दी।
बेंच ने क्या कहा?
बेंच ने कहा, ‘यह स्पष्ट किया जाता है कि ऊपर दिया गया निर्देश, सबरीमाला-मलिकप्पुरम देवस्वोम में वर्ष 1202 ME (मलयालम युग) (2026-27) के लिए मेलशांति के पद पर चयन से जुड़े मामलों में इस कोर्ट की ओर से पारित किए जाने वाले अंतिम आदेशों के अधीन होगा।’
बेंच ने कहा, ‘यह स्पष्ट किया जाता है कि ऊपर दिया गया निर्देश, सबरीमाला-मलिकप्पुरम देवस्वोम में वर्ष 1202 ME (मलयालम युग) (2026-27) के लिए मेलशांति के पद पर चयन से जुड़े मामलों में इस कोर्ट की ओर से पारित किए जाने वाले अंतिम आदेशों के अधीन होगा।’
याचिकाकर्ता ने क्या मांग की?
इस मामले की सुनवाई के लिए 2 नवंबर की तारीख तय की गई। याचिकाकर्ता राजीव ने बोर्ड से निर्देश देने की मांग की है कि उन्हें सबरीमाला श्री धर्मशास्ता मंदिर और मलिकप्पुरम मंदिर में मेलशांति की नियुक्ति के लिए चयन प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति दी जाए। उनका कहना है कि वे बोर्ड की ओर से जारी नोटिफिकेशन और गाइडलाइंस में बताई गई शर्तों को पूरा करते हैं।
इस मामले की सुनवाई के लिए 2 नवंबर की तारीख तय की गई। याचिकाकर्ता राजीव ने बोर्ड से निर्देश देने की मांग की है कि उन्हें सबरीमाला श्री धर्मशास्ता मंदिर और मलिकप्पुरम मंदिर में मेलशांति की नियुक्ति के लिए चयन प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति दी जाए। उनका कहना है कि वे बोर्ड की ओर से जारी नोटिफिकेशन और गाइडलाइंस में बताई गई शर्तों को पूरा करते हैं।
दलीलें सुनने के बाद, कोर्ट ने कहा कि मामले के तथ्यों और हालात, और याचिकाकर्ता की ओर से उपलब्ध कराए गए रिकॉर्ड को देखते हुए, उन्होंने अंतरिम आदेश पाने के लिए एक ठोस आधार बनाया है।


