राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पर एफआईआर दर्ज होने के बाद कांग्रेस की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह की ‘खतरनाक जोड़ी’ घबराई और हताश है।

दिल्ली पुलिस द्वारा आकाशवाणी भवन में जबरदस्ती घुसने के आरोप में लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने पर कांग्रेस की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की खतरनाक जोड़ी घबराई हुई और हताश है। विपक्षी पार्टी ने यह भी कहा कि साफ संकेत मिल रहे हैं कि आगे क्या होने वाला है। विपक्षी पार्टी का यह हमला तब हुआ जब दिल्ली पुलिस ने छह अक्तूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के मार्च के दौरान आकाशवाणी भवन में जबरदस्ती घुसने के आरोप में कांग्रेस के इन दो नेताओं और उनके समर्थकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।
चुनाव आयोग पर पार्टी ने क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा किया। पार्टी ने लिखा, ‘वोट चोर’ ज्ञानेश अपनी आदत से बाज नहीं आ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर अपीलों की सुनवाई के लिए ट्रिब्यूनल जज नियुक्त किए थे, लेकिन अब उस ट्रिब्यूनल के 19 जजों ने चुनाव आयोग के पोर्टल पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। जजों का कहना है कि चुनाव आयोग का पोर्टल उनके काम में अड़ंगा डाल रहा है। जजों के मुताबिक पोर्टल में बहुत सारी खामियां हैं। जैसे-
कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा किया। पार्टी ने लिखा, ‘वोट चोर’ ज्ञानेश अपनी आदत से बाज नहीं आ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर अपीलों की सुनवाई के लिए ट्रिब्यूनल जज नियुक्त किए थे, लेकिन अब उस ट्रिब्यूनल के 19 जजों ने चुनाव आयोग के पोर्टल पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। जजों का कहना है कि चुनाव आयोग का पोर्टल उनके काम में अड़ंगा डाल रहा है। जजों के मुताबिक पोर्टल में बहुत सारी खामियां हैं। जैसे-
- ट्रिब्यूनल सीधे पार्टियों को नोटिस नहीं भेज सकते
- ट्रिब्यूनल पार्टियों की ऑनलाइन सुनवाई नहीं कर पा रहे
- अपीलों के रिकॉर्ड को रखने का कोई ऑप्शन नहीं है, क्योंकि इन्हें डिजिटल नहीं किया गया
- अपीलकर्ता के पास ट्रिब्यूनल का आदेश डाउनलोड करने या उसकी सर्टिफाइड कॉपी पाने का ऑप्शन नहीं है
- ट्रिब्यूनल कोई डॉक्यूमेंट स्टोर नहीं कर सकते और जब जज, डीएम या डीईओ को ईमेल करते हैं, तो उसका रिस्पॉन्स बहुत खराब है।
पार्टी ने लिखा, ‘साफ है- पहले तो मोदी के इशारे पर ज्ञानेश ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर के नाम पर लोगों के वोट काटे और अब जजों को काम नहीं करने दे रहे हैं।’ गद्दार ज्ञानेश याद रखे कि न तो वो बचेगा, न ही उसके आका। सबका हिसाब होगा, सब नपेंगे।


