मेरठ के सौरभ हत्याकांड में आज कोर्ट का फैसला आ सकता है। भाई बबलू ने मामले में 11 और मां रेनू ने 9 तारीखों में बयान दर्ज कराए हैं। परिजन का कहना है कि पेशी के दौरान सौरभ की हत्यारोपी मुस्कान और साहिल के चेहरे पर शिकन तक नहीं दिखी। ऐसा भी नहीं लगा कि दोनों को कोई पछतावा है।

देशभर में चर्चा में रहे सौरभ हत्याकांड में आज जिला न्यायालय में फैसला सुनाया जा सकता है। जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने इस केस के फैसले के लिए 30 सितंबर की तिथि निर्धारित की है।
सौरभ के भाई बबलू और मां रेनू देवी का कहना है कि इस वारदात की याद आज भी न केवल उन्हें, बल्कि आमजन को भी झकझोर देती है। इसके बावजूद पेशी के दौरान सौरभ की हत्यारोपी मुस्कान और साहिल के चेहरे पर शिकन तक नहीं दिखी।
परिजनों के मुताबिक ऐसा भी नहीं लगा कि दोनों को कोई पछतावा है। उन्हें देखकर लगा कि दोनों मेरठ जेल में रहकर खुश हैं। इसलिए अगर अदालत दोनों को सजा सुनाती है तो वे उन्हें दूसरे जिलों की अलग-अलग जेलों में स्थानांतरित करने की मांग करेंगे।
ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र के इंद्रानगर निवासी सौरभ के भाई बबलू ट्रांसपोर्ट का कारोबार करते हैं। उनका कहना है कि अप्रैल में जब दोनों आरोपी न्यायालय में पेशी पर आए थे, तब उन्हें देखकर ऐसा नहीं लग रहा था कि वे जेल से आए हैं। उनका कहना है कि आरोपियों ने सुनियोजित साजिश रचकर वारदात को अंजाम दिया और जेल में भी दोनों के एक साथ रहने से वे काफी खुश दिखाई दिए।
रेनू देवी का कहना है कि पति की मौत के बाद महिलाएं आमतौर पर मेकअप आदि से परहेज करती हैं, लेकिन जेल में रहने के बाद भी मुस्कान इनसे दूर नहीं रह पाई थी।
11 बार बबलू और 9 बार रेनू ने दर्ज कराए बयान
बबलू ने बताया कि वह बयान दर्ज कराने के लिए 11 बार और उनकी मां रेनू देवी 9 बार न्यायालय गई थीं। गवाही के अलावा उनसे बचाव पक्ष की वकील ने लंबी जिरह भी की थी।
दोनों का कहना है कि शादी के बाद से ही परिवार के प्रति मुस्कान का व्यवहार अच्छा नहीं था। लंदन से लौटने के बाद भी वह सौरभ और बेटी के लिए खाना नहीं बनाती थी। सौरभ की बेटी पीहू को वह उनके घर नहीं आने देती थी। परिजनों का कहना है कि वारदात के बाद सभी को गुमराह करने के लिए वह सौरभ का मोबाइल अपने साथ ले गई थी। वह यह दर्शाना चाहती थी कि वह सौरभ के साथ घूमने गई है।
बेटे को क्यों मारा… छलके मां के आंसू
रेनू देवी के यह कहते हुए आंसू निकल आए कि आरोपियों को उनके बेटे को इस तरह मारने की क्या जरूरत थी। उन्होंने बताया कि सौरभ के लंदन जाने के बाद वह साहिल से मिलती थी और उसे अपने घर भी बुलाती थीं। अगर उसे किसी चीज की जरूरत होती तो वह उनसे मांग सकता था। रेनू देवी का कहना है कि मुस्कान शादी के बाद से ही अपनी मनमानी करती थी। इसी वजह से वह उनका घर छोड़कर किराये के मकान में रहने लगी थी।
अब तक विसर्जित नहीं कर पाए सौरभ के कपड़े
बबलू ने बताया कि वे सौरभ के कपड़े अब तक विसर्जित नहीं कर पाए हैं। सौरभ जिस कमरे में किराये पर रहता था, पुलिस ने उस कमरे को सील कर दिया था। वारदात के बाद उन्होंने कमरे में सौरभ के कुछ कपड़े टंगे देखे थे, जबकि बाकी कपड़े भी कमरे में ही थे। परिजनों का कहना है कि अब तक उन्हें सौरभ के कपड़े नहीं मिल पाए हैं, इसलिए उनका विसर्जन भी नहीं कर सके।
सौरभ हत्याकांड : फैसले की तारीख आज
सौरभ की हत्यारोपी पत्नी मुस्कान रस्तौगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को न्यायालय में पेश करना एक बार फिर चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। उन्हें बुधवार रात तक जिला कारागार से तलब नहीं किया गया। उम्मीद है कि दोनों की पेशी इस बार भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कराई जाएगी।
18 मार्च 2025 को इंद्रानगर निवासी बबलू ने ब्रह्मपुरी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि उनके भाई सौरभ ने शास्त्री की कोठी के सामने रहने वाली मुस्कान रस्तौगी से वर्ष 2016 में प्रेम विवाह किया था। वर्ष 2019 में मुस्कान के संबंध में रंजन वाली गली में रहने वाले साहिल शुक्ला से हो गए थे। तब से सौरभ परेशान रहता था।
वह कहता है कि उसे उसकी पत्नी व साहिल शुक्ला से जान का खतरा है। पांच मार्च 2025 से सौरभ अचानक लापता हो गया था। वह ओमपाल के जिस मकान में किराए पर रहता था वहां ताला लगा हुआ था। वहां मुस्कान भी नहीं थी। बबलू ने आशंका जताई थी कि मुस्कान और साहिल ने मिलकर सौरभ की हत्या कर दी है। उन्होंने सौरभ को तलाशने की मांग की थी।
18 मार्च को पुलिस ने खुलासा किया था कि तीन मार्च की रात मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल ने सौरभ की हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद पांच मार्च को दोनों घूमने के लिए शिमला मनाली घूमने चले गए थे। दोनों 17 मार्च को मेरठ लौटे तो पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर नीले ड्रम से सौरभ के शव के टुकड़े बरामद किए थे।
17 अप्रैल 2026 को अंतिम बार कोर्ट में लाए गए थे हत्यारोपी
प्रेम विवाह करने वाले पति की निर्मम हत्या से लोगों में आक्रोश था। 19 मार्च को जब दोनों को कड़ी सुरक्षा में न्यायालय में पेश करने पहुंची तो आक्रोशित वकीलों ने साहिल की पिटाई कर दी थी। पुलिस ने बमुश्किल दोनों का बचाव किया था।
इसके बाद से दोनों आरोपियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी हो रही है। हालांकि इससे पहले 17 अप्रैल 2026 को दोनों को कोर्ट में पेश किया जा चुका है। डीजीसी कृष्ण कुमार चौबे का कहना है कि 22 गवाहों के बयानों और दोनों पक्षों के वकीलों की बहस सुनने के बाद जिला न्यायालय ने इस केस के निर्णय के लिए बुधवार की तिथि निर्धारित की है।