यूपी के बुलंदशहर जिले में चार बेटों ने मां-बाप का बंटवारा कर दिया। दो बेटे मां को साथ रखने के लिए राजी हो गए, जबकि दो बेटों ने पिता को साथ ले गए। बेटों के कारण 50 साल बाद गृहस्थी टूट गई। बुजुर्ग दंपती के बीच अलग छतों के नीचे पनपी गलतफहमी ने रिश्ते में दरार ला दी। 70 वर्ष की उम्र में पत्नी ने 75 वर्षीय पति से तलाक मांगा। परामर्श केंद्र में भी सुलह नहीं हो सकी। जीवन के अंतिम पड़ाव पर भरण-पोषण भत्ते पर सहमति बनी।
अभिनेता अमिताभ बच्चन की फिल्म बागवान की याद ताजा करती यह कहानी भी कुछ ऐसी ही है जिसमें चार बेटों की संवेदनहीनता ने करीब 50 साल पुराने माता-पिता के दांपत्य बंधन को हमेशा के लिए तोड़ दिया।
जिस उम्र में हाथ थामकर सहारे की जरूरत थी, उसी उम्र में मजबूरी के अलगाव ने रिश्तों में ऐसी खटास पैदा की है कि 70 वर्षीय बुजुर्ग पत्नी ने अपने 75 वर्षीय पति से तलाक तक की मांग कर दी। मामला एसएसपी कार्यालय स्थित महिला परामर्श केंद्र पहुंचा, जहां दोनों में सुलह कराने की तमाम कोशिशें नाकाम साबित हुईं। बाद में दोनों के बीच पति द्वारा पत्नी को खर्चा देने की बात पर सहमति बनी है। बुजुर्ग पति अपनी पत्नी को पांच हजार रुपये हर महीने गुजारा भत्ता देंगे।
सिकंदराबाद कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी 75 वर्षीय बुजुर्ग और उनकी 70 वर्षीय पत्नी ने करीब 50 वर्ष तक हर सुख-दुख साथ साझा किया। दंपती के चार बेटे हैं और सभी संपन्न हैं। माता-पिता को उम्मीद थी कि जीवन के आखिरी पड़ाव पर बेटे सेवा करेंगे, लेकिन बेटों ने सेवा करने के बजाय उनका आपस में बंटवारा कर दिया।
दो बेटों ने मां को अपने पास रख लिया, जबकि दो बेटे पिता को अपने साथ ले गए। जीवन के 50 साल साथ देखने वाले बुजुर्ग दंपती को बुढ़ापे में जबरन अलग-अलग रहने पर मजबूर होना पड़ा। अलग-अलग रहने के कारण पति-पत्नी के बीच संवादहीनता बढ़ने लगी।
बेटों के घर रहते हुए जब कभी दोनों की फोन पर बात या मुलाकात होती, तो संतानों के व्यवहार और पारिवारिक तनाव के चलते उनके बीच नोकझोंक होने लगी। धीरे-धीरे यह कड़वाहट इतनी बढ़ गई कि दोनों एक-दूसरे पर आरोप लगाने लगे।
बात इतनी बिगड़ी कि 70 वर्षीय बुजुर्ग ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराकर पति से तलाक और भरण-पोषण की गुहार लगा दी। इस उम्र में तलाक की अर्जी देखकर पुलिस अधिकारी भी सन्न रह गए। मामले को समाधान के लिए महिला परामर्श केंद्र (महिला सेल) भेजा गया।
काउंसलर्स ने कई दौर की वार्ता कर दंपति को समझाने और फिर से एक छत के नीचे लाने का प्रयास किया। हालांकि, वर्षों के अलगाव और उपजी गलतफहमियों ने उनके दिल में ऐसी खाई बना दी थी जिसे पाटा नहीं जा सका। दोनों ही पक्ष अब साथ रहने को तैयार नहीं हुए। वहीं अब पुलिस और काउंसलर्स की मौजूदगी में सहमति बनी कि बुजुर्ग पति अपनी पत्नी को प्रतिमाह तय गुजारा भत्ता देगा।
दंपती के बीच विवाद का मुख्य कारण बेटों द्वारा उन्हें अलग-अलग रखना था। दोनों को साथ रखने के लिए काफी समझाया गया, लेकिन वे अब तैयार नहीं हुए। पति अपनी पत्नी को हर माह गुजारा भत्ता देने पर सहमत हो गया है, जिसके बाद समझौते के आधार पर मामले का निस्तारण कर दिया गया। – अलका चौधरी, प्रभारी, महिला परामर्श केंद्र