गांव रूदायन में किसान और भूमिहीन खेत मजदूरों के लिए समरसता कार्रक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित मिरांडा हाउस और हिंदू कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. चंद्रकांता के. माथुर ने कहा कि ग्रामीण भारत में समरसता और खुशहाली तभी संभव है, जब किसान और भूमिहीन खेत मजदूर परिवारों की महिलाएं एक साथ मिलकर काम करें।
शनिवार को अयोजित कार्रक्रम में उन्होंने बताया कि नवीन भारत के निर्माण में इन दोनों ही महिला समूहों से नेतृत्व का उभरना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि खेती का पहिया किसान और भूमिहीन खेत मजदूरों दोनों के आपसी सहयोग से ही आगे बढ़ता है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि किसान परिवारों और मजदूर परिवारों की महिलाएं न केवल अपने घर और परिवार के दायित्वों को पूरी तरह निभाती हैं, बल्कि खेती-किसानी के कामों में भी बेहद सक्रिय भूमिका निभाती हैं।
ऐसे में इन दोनों महिला समूहों के बीच आपसी सामंजस्य और तालमेल होना बेहद जरूरी है, क्योंकि यही जुड़ाव ग्रामीण समाज में समरसता की नींव रखेगा। भाजपा कार्यक्रम में मुख्य रूप से भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष प्रेम सिंह कुशवाहा और श्याम प्रसाद जी उपस्थित रहे। उनके साथ ही बृजेश कुमार सिकंद्राराऊ, अनु देवी, माधवी देवी अविशा और रवि सहित बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण और प्रबुद्धजन मौजूद रहे। कार्यक्रम में आए सभी अतिथियों का ग्रामीणों ने गर्मजोशी से स्वागत किया।



