अमेरिका में सिख समुदाय के खिलाफ नस्ली और धार्मिक भेदभाव का इतिहास पुराना है। 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों के बाद पगड़ी और दाढ़ी रखने वाले सिखों को कई बार मुस्लिम समझकर निशाना बनाया गया।

अमेरिका में सिख समुदाय को उनकी पहचान, पहनावे और शक्ल-सूरत के आधार पर निशाना बनाए जाने की घटनाओं को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग के आधिकारिक सोशल मीडिया पर जारी एक विवादित पोस्टर ने इस मुद्दे को नई बहस के केंद्र में ला दिया है। पोस्टर में एक भूरे रंग के व्यक्ति को ट्रांसफॉर्मर जैसे रोबोट के सामने दिखाया गया और उस पर लिखा था अमेरिका अमेरिकियों के लिए।
अमेरिका में सिख समुदाय के खिलाफ नस्ली और धार्मिक भेदभाव का इतिहास पुराना है। 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों के बाद पगड़ी और दाढ़ी रखने वाले सिखों को कई बार मुस्लिम समझकर निशाना बनाया गया। इसके बाद सिखों के खिलाफ हिंसा और घृणा की कई घटनाएं सामने आईं। एफबीआई के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, वर्ष 2025 में सिख विरोधी घृणा अपराध के 177 मामले दर्ज किए गए। सिख संगठनों का कहना है कि यह आंकड़ा समुदाय के खिलाफ बढ़ते नफरत और नस्ली पूर्वाग्रह की गंभीर तस्वीर पेश करता है।
अमेरिकी सरकारी विभाग के पोस्टर पर विवाद
ताजा पोस्टर विवाद में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अमेरिकी सरकारी विभाग के आधिकारिक प्रचार में ‘सिंह’ जैसे व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाले सिख उपनाम को ऐसे संदेश के साथ क्यों जोड़ा गया, जिसे प्रवासियों के खिलाफ अभियान के तौर पर देखा जा रहा है। सिख संगठनों का कहना है कि अमेरिका में लाखों सिख ‘सिंह’ उपनाम का इस्तेमाल करते हैं और अपनी पहचान पर गर्व करते हैं।
ऐसे में सरकारी मंच से ‘मिस्टर सिंह’ को निशाना बनाना समुदाय के बीच चिंता पैदा करने वाला है। पोस्टर विवाद और अमेरिका में सिख समुदाय के खिलाफ बढ़ती घटनाओं को लेकर पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि विदेशों में बसे सिखों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
समुदाय से जुड़े लोगों का कहना है कि अमेरिका में सिख लंबे समय से देश के सामाजिक, आर्थिक और सार्वजनिक जीवन में योगदान दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें उनकी धार्मिक और नस्ली पहचान के कारण भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। सिख संगठनों का कहना है कि ‘मिस्टर सिंह’ वाला पोस्टर भले ही सोशल मीडिया से हटा दिया गया हो, लेकिन इसने अमेरिका में सिखों के खिलाफ नस्ली पूर्वाग्रह, पहचान आधारित भेदभाव और घृणा अपराधों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। संगठन चाहते हैं कि ऐसे मामलों को महज सोशल मीडिया विवाद मानने के बजाय अमेरिका में सिख समुदाय की सुरक्षा और बढ़ते नस्ली भेदभाव के व्यापक संदर्भ में देखा जाए।