रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और सफलता की कामना करते हुए उनकी कलाई पर रक्षासूत्र बांधती हैं। शास्त्रों के अनुसार, भाई की राशि और शुभ प्रतीकों के अनुसार सही राखी का चयन उसके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य लाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित मुकेश शास्त्री (भागवताचार्य) के अनुसार, भाई की राशि के अनुरूप राखी चुनने से जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता और शांति मिलती है।
गुरूवार को ज्योतिषाचार्य ने बताया कि मेष राशि के लिए लाल या मैहरून रंग की राखी बांधें, जिससे उत्साह और साहस बना रहे। वृषभ राशि के लि शांति और स्थिरता के लिए सफेद, चांदी या नीले रंग की राखी उत्तम है। मिथुन राशि वाले बुद्धि और व्यापार में वृद्धि के लिए हरे रंग या रेशमी धागे की राखी चुनें। कर्क राशि वाले मानसिक शांति और स्वास्थ्य लाभ के लिए सफेद या मोती जड़ी राखी बांधें। सिंह राशि वाले मान-सम्मान बढ़ाने के लिए नारंगी, सुनहरे या लाल रंग की राखी शुभ है। कन्या राशि वाले कार्यकुशलता में सुधार के लिए हरे, नीले या गहरे रंग की राखी का चयन करें। तुला राशि वाले जीवन में संतुलन और खुशहाली के लिए सफेद या क्रीम रंग की राखी बांधें। वृश्चिक राशि वाले नकारात्मक ऊर्जा से बचाव के लिए लाल, मैरून या गुलाबी राखी सर्वोत्तम है। धनु राशि वाले ज्ञान और तरक्की के लिए पीले या केसरिया रंग की राखी बांधें। मकर राशि वाले कैरियर में सफलता के लिए नीले या गहरे रंग की राखी शुभ मानी जाती है। कुंभ राशि वाले नए अवसरों की प्राप्ति के लिए नीले, आसमानी या बहुरंगी राखी चुनें। मीन राशि वाले सुख और समृद्धि के लिए पीले, सुनहरे या केसरिया रंग की राखी बांधें। पवित्र प्रतीकों वाली राखियां यदि भाई की राशि ज्ञात न हो, तो सनातन धर्म के पवित्र प्रतीकों वाली राखी चुनी जा सकती है स्वास्तिक राखी विघ्न-बाधाओं को दूर कर सफलता के मार्ग खोलती है। ॐ राखी मानसिक शांति और सुरक्षा प्रदान करती है।रुद्राक्ष राखी आरोग्य देती है और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करती है। मौली (कलावा) त्रिदोष नियंत्रण और धार्मिक दृष्टि से सबसे शुद्ध रक्षासूत्र है। पंडित मुकेश शास्त्री ने बताया कि राखी खरीदते समय ध्यान रखें कि धागा या मोती खंडित न हों। प्लास्टिक के नुकीले आकार, कंकाल या अशुभ चिह्नों वाली राखियों से बचें। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर काले रंग के धागे या पत्थरों वाली राखी का प्रयोग भूलकर भी न करें।
Author: Sunil Kumar
SASNI, HATHRAS


