श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को भाई बहन के पवित्र एवं पावन पर्व रक्षाबंधन मनाया जाता है, इस दिन बहन द्वारा अपने भाई की कलाई पर बांधा गया रक्षासूत्र जीवन भर की रक्षा के लिए प्रेरित करता है।
गुरूवार को दूरभाष पर एक प्रेसवार्ता के दौरान अलीगढ़ के वैदिक ज्योतिष संस्थान के प्रमुख स्वामी पूर्णानंदपुरी जी महाराज ने रक्षाबंधन के विषय में बताया कि इस पर्व को श्रावणी नाम से भी जाना जाता है जो कि आत्म शुद्धि और प्रायश्चित का पर्व है। ब्राह्मणों की कार्यशैली से जुड़े इस पर्व पर शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि हेतु पवित्र गंगा नदी में अपने सभी कर्मों का प्रायश्चित कर सत्कर्म का संकल्प लेते हैं। इसके साथ ही ब्राह्मण अपने पुराने यज्ञोपवीत को उतारकर नया यज्ञोपवीत धारण करते हैं। रक्षाबंधन के विषय में उन्होंने बताया कि इस बार श्रावण शुक्ल पूर्णिमा तिथि का आरंभ 27 अगस्त गुरुवार को प्रातः 9 बजकर 8 मिनट से प्रारम्भ होगा जो कि अगले दिन 28 अगस्त शुक्रवार को प्रातः 9 बजकर 47 मिनट तक रहेगा और ऐसे में उदयातिथि के अनुसार रक्षाबंधन पर्व 28 अगस्त शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस बार रक्षाबंधन पर लगने वाले चन्द्रग्रहण को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है जिसको लेकर उन्होंने बताया कि वर्ष का दूसरा और अंतिम चंद्रग्रहण 28 अगस्त को आंशिक चंद्र ग्रहण रहेगा। यह शनि की राशि कुंभ और शतभिषा नक्षत्र में घटित होगा। यह चंद्र ग्रहण भारत में नहीं होने के कारण इसके सूतक और नियम भी मान्य नहीं रहेंगे, अतः राखी पर्व पर ग्रहण का प्रभाव भी नहीं रहेगा,वहीं भद्रा भी सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी। रक्षा बंधन पर लगने वाले शुभ योग के विषय में स्वामी पूर्णानंदपुरी महाराज ने बताया कि भद्रा रहित राखी पर्व में इस बार अतिगंड और सौम्य योग बन रहे हैं जो कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। राखी बाँधने का शुभ मुहूर्त प्रातः 06 बजे से 9 बजकर 47 मिनट तक अति शुभ मुहूर्त है। इसके अलावा, पूरे दिन उदया तिथि होने के कारण बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध सकती है, इस दिन शतभिषा नक्षत्र भी पूरे दिन प्रभावी रहेगा।
Author: Sunil Kumar
SASNI, HATHRAS
