पंचायतों में न्यूनतम 10 पशुओं के लिए 350 गज जमीन पर पट्टा मिल सकेगा। अधिकतम कितने भी पशु रखे जा सकेंगे। जो भी पट्टा मिलेगा वह 5 या अधिकतम 8 वर्ष बाद वापस करनी होगी। पंचायत किसी गड़बड़ी पर बीच में भी पट्टा रद्द कर सकेंगी।

हरियाणा में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को डेयरी संचालन के लिए पंचायतों में 500 गज तक जमीन मिलेगी। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में पंजीकृत स्वयं सहायता समूहों को 5 वर्ष के लिए पंचायती जमीन मिल सकेगी। राज्य में पंचायती जमीन पर पट्टा देने के लिए सभी जिलों में तीन-तीन सदस्यीय समितियों का गठन कर दिया है।
हरियाणा पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेंद्र कुमार ने सभी जिलों के उपायुक्तों को योजना को लागू करने के लिए नियम-निर्देशों से संबंधित पत्र भेजा है। जिलों में गठित समितियों में जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (डीडीपीओ) को समिति में सदस्यों के रूप में शामिल किया है। विभागीय योजना के अनुसार, समूहों के सदस्य उसी गांव के निवासी हों।
समूहों का कार्य बेहतर होने पर आगामी 3 वर्ष के लिए इस अवधि को बढ़ाया जा सकेगा। योजना का लाभ उन्हीं समूहों को मिलेगा जोकि कम से कम एक वर्ष से अधिक समय से संचालित हों। नियमित बचत, ऋण से संबंधित ब्योरा उपलब्ध हो। सरकारी योजना या बैंक के साथ कोई विवाद या गड़बड़ी न की हो। इन समूहों में न्यूनतम 10-10 सदस्य हों। समूहों की आयोजित होने वाली बैठकों में न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति हो। समूह की किसी भी सदस्य के पास 500 गज या उससे अधिक भूमि भूमि न हो।
ग्राम पंचायत के पास आवेदन देने के बाद प्रस्ताव कराने होंगे पास
पंचायतों में स्वयं सहायता समूह या स्वयं सहायता समूहों की सहकारी समितियां ग्राम पंचायत या जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी या खंड विकास पंचायत अधिकारी के पास आवंटन पाने के लिए आवेदन करना होगा। एक से अधिक आवेदन प्राप्त होने पर सरपंच की अध्यक्षता वाली 6 सदस्यीय समिति लॉटरी से निर्णय करेगी।
पंचायतों में स्वयं सहायता समूह या स्वयं सहायता समूहों की सहकारी समितियां ग्राम पंचायत या जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी या खंड विकास पंचायत अधिकारी के पास आवंटन पाने के लिए आवेदन करना होगा। एक से अधिक आवेदन प्राप्त होने पर सरपंच की अध्यक्षता वाली 6 सदस्यीय समिति लॉटरी से निर्णय करेगी।