भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता 2030 तक भारत के निर्यात को 115 अरब डॉलर तक पहुंचा सकता है। एसोचैम की रिपोर्ट में 7-10 लाख नए रोजगार के अवसर और एमएसएमई वृद्धि की संभावना जताई गई है, लेकिन गुणवत्ता और मानकों का अनुपालन महत्वपूर्ण होगा।

भारत और ब्रिटेन के बीच लागू हुआ मुक्त व्यापार समझौता (एफ.टी.ए.) भारतीय निर्यात के लिए एक बड़ा अवसर लेकर आया है। उद्योग निकाय एसोचैम ने अपने एक अध्ययन में यह महत्वपूर्ण जानकारी दी है। इस समझौते के प्रभावी होने से 2030 तक ब्रिटेन को भारत का निर्यात 115 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है।
क्या भारत इस विशाल क्षमता को हासिल कर पाएगा?
भारत के लिए इस विशाल क्षमता को पूरी तरह से साकार करना एक महत्वपूर्ण चुनौती होगी। इसके लिए भारतीय व्यवसायों को अपनी निरंतर प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्हें उत्पादों की गुणवत्ता के उच्च मानकों को हर हाल में पूरा करना होगा।
साथ ही, विभिन्न प्रमाणन आवश्यकताओं का भी सख्ती से पालन करना सुनिश्चित करना होगा। मूल नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करना भी अनिवार्य होगा, ताकि व्यापार में कोई बाधा न आए। इसके अतिरिक्त, अंतरराष्ट्रीय स्थिरता मानकों को पूरा करना भी भारतीय उद्योगों के लिए आवश्यक होगा, जो वैश्विक बाजार में उनकी स्वीकार्यता बढ़ाएगा।
सफलता की कुंजी क्या होगी?
एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने इस दिशा में कुछ प्रमुख कारकों पर प्रकाश डाला है। उन्होंने बताया कि कारोबार सुगमता में सुधार के लिए किए गए सुधार महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे में निरंतर निवेश करना भी आवश्यक होगा, जिससे व्यापारिक गतिविधियां सुगम होंगी।
एक मजबूत और कुशल आपूर्ति शृंखला का विकास भी सफलता की कुंजी होगा, जो उत्पादों को समय पर पहुंचाने में मदद करेगा। इन सभी मानदंडों को सफलतापूर्वक पूरा करके ही भारत इस समझौते का अधिकतम लाभ उठा पाएगा और अपनी निर्यात क्षमता बढ़ा सकेगा।
किन क्षेत्रों को मिलेगा सबसे अधिक लाभ?
निर्मल के. मिंडा के अनुसार, इंजीनियरिंग सामान क्षेत्र को इस व्यापार समझौते से विशेष रूप से लाभ मिलने की उम्मीद है। यह क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इसमें विकास की अपार संभावनाएं हैं। समझौते से इस क्षेत्र को मिलने वाला प्रोत्साहन सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की वृद्धि को बढ़ावा देगा। यह एमएसएमई क्षेत्र देश में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन को भी गति प्रदान करेगा। यह समझौता कई भारतीय उद्योगों के लिए विकास के नए द्वार खोलेगा और उन्हें वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बनाने में मदद करेगा।