शहर में आठ जुलाई की बारिश से शहर में जलभराव हुआ था। हालांकि, तब प्रशासन ने पूरी सफाई न होने का दावा किया था। उसके बाद दो दिन में रिपोर्ट बनाकर भी भेज दी। इन सवालों ने शक पैदा किया है।

बहादुरगढ़ नगर परिषद के चार अधिकारियों ने छह दिन में 67 नालों की सफाई दिखाकर उपायुक्त को रिपोर्ट भेज दी। 10 जुलाई को भेजी इस रिपोर्ट में 44 नालों की सफाई का दावा किया गया है। मगर जमीनी हकीकत अलग है। टेंडर जारी होने के 17 दिन बाद भी 44 में से एक भी नाला पूरी तरह साफ नहीं हो सका है। रिपोर्ट शक के दायरे में तब आ गई जब नौ कर्मचारियों के सहारे छह दिन में 67 किलोमीटर नाले सफाई करने का दावा किया गया। जबकि टेंडर में करीब 45 कर्मचारियों को रखने का प्रावधान है।
नगर परिषद के चार अधिकारियों ने बनाकर भेजी है रिपोर्ट
शहर में आठ जुलाई की बारिश से शहर में जलभराव हुआ था। हालांकि, तब प्रशासन ने पूरी सफाई न होने का दावा किया था। उसके बाद दो दिन में रिपोर्ट बनाकर भी भेज दी। इन सवालों ने शक पैदा किया। अमर उजाला के संवाद सहयोगी ने जब रिपोर्ट को पढ़ा तो कई सवाल अधूरे थे। रिपोर्ट पर नगर परिषद के चार अधिकारियों के हस्ताक्षर थे।
इसके बाद मौके पर पड़ताल की गई, तो देखा कि कई प्रमुख नालों में अभी भी गाद जमा है। कई जगहों पर अतिक्रमण के कारण मशीनें अंदर तक नहीं पहुंच सकीं। 100 से 200 मीटर लंबी पुलियों के नीचे पुरानी गाद जमा है। कई नालों से निकाली गई गाद किनारों पर ही छोड़ दी गई जो पहली बारिश में दोबारा नालों में बह गई।
नगर परिषद की चेयरपर्सन भी नाला सफाई को लेकर सवाल उठा चुकी हैं। उन्होंने अधिशासी अभियंता को लिखे पत्र में ठेके की शर्तों के विपरीत कार्यों को लेकर आरोप लगाए थे। इसके बाद भी अधिकारियों ने अधूरी सफाई की रिपोर्ट डीसी को भेज दी।
Author: priya singh
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