
गांव भोजगढ़ी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चैथे दिन जैसे-जैसे कथा आगे बढ़ी, पंडाल में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता गया। भागवत आचार्य पंडित मुकेश शास्त्री ने कथा का शुभारंभ अत्यंत भावपूर्ण शैली में करते हुए भगवान शिव विवाह का मनोहारी वर्णन किया। उनके सजीव और रसपूर्ण कथन को सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और पूरा पंडाल हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा।
सोमवार को शिव विवाह कथा के बाद आचार्य ने भक्त धु्रव की प्रेरणादायक कथा का श्रवण कराया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार बालक ध्रुव ने कठिन तपस्या, अटूट विश्वास और एकनिष्ठ भक्ति के बल पर भगवान की कृपा प्राप्त की। कथा के इस प्रसंग ने श्रद्धालुओं को जीवन में धैर्य, समर्पण और दृढ़ संकल्प का संदेश दिया।

आचार्य मुकेश शास्त्री ने जड़ भरत की कथा का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हुए तेतीस नरकों का उल्लेख किया और मानव जीवन में सत्कर्म, सदाचार तथा धर्मपालन के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में अच्छे कर्मों को अपनाकर ही मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होना चाहिए। उनके प्रवचन ने श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया और कथा पंडाल में एक गंभीर, लेकिन भक्तिमय वातावरण बना रहा। पूरे आयोजन के दौरान भजन-कीर्तन की मधुर धुनों ने माहौल को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया। इस अवसर पर आचार्य अभिषेक कुमार सहित परीक्षित आनंद शर्मा, शालिनी शर्मा, अरुण शर्मा, माया शर्मा, बबलू शर्मा, कुशमा शर्मा, शशिवाला शर्मा, अभिषेक शर्मा, शिव कुमार शर्मा, कौशल शर्मा, मोनी शर्मा एवं भुवनेश कुमार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने आचार्य से आशीर्वाद प्राप्त किया और प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
Author: Sunil Kumar
SASNI, HATHRAS

