36 साल की सेवा का हक: डेढ़ दशक बाद हाईकोर्ट ने दिए वर्कचार्ज सेवा को पेंशन योग्य मानने का आदेश

Picture of Farheen

Farheen

SHARE:

अदालत ने 1988 के केसर चंद मामले और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि पेंशन कर्मचारी का निरंतर अधिकार है।

Entitlement to 36 years of service High Court orders work charged service treated as pensionable

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्मचारी को बड़ी राहत देते हुए पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड को उसकी नियमित नियुक्ति से पहले की वर्कचार्ज सेवा को भी पेंशन योग्य सेवा में शामिल करने का आदेश दिया है। करीब डेढ़ दशक की कानूनी लड़ाई के बाद यह फैसला आया है।

होशियारपुर निवासी गंगाधर शर्मा ने 7 अप्रैल 1955 को तत्कालीन पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड में वर्कचार्ज कर्मचारी के रूप में नौकरी शुरू की थी। बाद में उनकी सेवाएं नियमित कर दी गईं और सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन तय की गई। हालांकि पेंशन निर्धारण के समय उनकी शुरुआती सेवा अवधि को शामिल नहीं किया गया जिससे उनकी पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ प्रभावित हुए।

ट्रायल कोर्ट ने 2012 में उनकी याचिका खारिज कर दी थी जबकि अतिरिक्त जिला न्यायाधीश ने 2013 में अपील भी नामंजूर कर दी। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। करीब 13 वर्षों तक चली सुनवाई के दौरान मामले की केवल 13 बार सुनवाई हुई।
हाईकोर्ट ने ट्रायल और अपीलीय अदालतों के फैसले रद्द करते हुए कहा कि नियमितीकरण से पहले की वर्कचार्ज सेवा भी पेंशन के लिए योग्य सेवा मानी जाएगी। अदालत ने 1988 के केसर चंद मामले और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि पेंशन कर्मचारी का निरंतर अधिकार है। अदालत ने 7 अप्रैल 1955 से 30 मई 1991 तक की सेवा को पेंशन योग्य मानकर सभी लाभ दोबारा निर्धारित करने के आदेश दिए।
Farheen
Author: Farheen

सबसे ज्यादा पड़ गई