विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन सरकार के ‘रबड़ स्टैंप’ की तरह काम कर रहा है। आरोप है कि सत्ताधारी दल के चहेतों को रातों-रात एनओसी बांटी जा रही है, जबकि विपक्षी उम्मीदवारों को तकनीकी कमियों का बहाना बनाकर टरकाया जा रहा है।

चुनाव लड़ने के लिए अनिवार्य ‘एनओसी’ (अनापत्ति प्रमाण पत्र) को लेकर शुरू हुआ विवाद इस कदर बढ़ा कि पूरा विपक्ष एक मंच पर आ गया। भाजपा जिलाध्यक्ष दामन बाजवा के नेतृत्व में गुस्साए उम्मीदवारों ने ईओ के कार्यालय पर धावा बोल दिया और कुर्सियां हटाकर फर्श पर ही दरी बिछा दी।
‘प्रशासन मुर्दाबाद’ के नारों से पूरा परिसर घंटों गूंजता रहा। कुछ ही पलों में कांग्रेस के नेता जसविंदर धीमान, अकाली नेता अमनबीर सिंह चैरी, कांग्रेस के ब्लाक अध्यक्ष मनप्रीत बडैच आदि पहुंच गए।
प्रदर्शनकारियों का गुस्सा उस समय सातवें आसमान पर पहुंच गया जब घंटों इंतजार के बाद भी न तो एनओसी मिली और न ही अधिकारी। नाराज भाजपा, कांग्रेस, शिअद के प्रत्याशियों ने दफ्तर के भीतर अधिकारियों की कुर्सियां एक तरफ धकेल दीं और जमीन पर बैठ गए। उम्मीदवारों ने चेतावनी दी कि जब तक प्रमाण पत्र नहीं मिलेगा, तब तक दफ्तर से घर वापसी नहीं होगी।
विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन सरकार के ‘रबड़ स्टैंप’ की तरह काम कर रहा है। आरोप है कि सत्ताधारी दल के चहेतों को रातों-रात एनओसी बांटी जा रही है, जबकि विपक्षी उम्मीदवारों को तकनीकी कमियों का बहाना बनाकर टरकाया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने इसे चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया।
हंगामे के कुछ देर बाद ईओ दफ्तर में पहुंचे और उन्होंने कई उम्मीदवारों को एनओसी जारी कर दी। इस मौके पर घनश्याम कांसल, मोनिका गोयल, सुखी जिम, राजीव मक्खन, हाकम सिंह, रिंकू आलमपुर आदि मौजूद रहे।