पंजाब में गैर जमानती धाराओं में दो केस दर्ज, पुलिस घर पहुंची तो गाड़ी में बैठकर निकले

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संदीप पाठक कुछ समय पहले छह सांसदों के साथ आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। वे अरविंद केजरीवाल के काफी नजदीकी माने जाते थे।

MP Sandeep Pathak Two Cases Registered in Punjab on Charges of Corruption Non-Bailable Arrest all update

आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सांसद संदीप पाठक की दिक्कतें बढ़ गई हैं। पाठक पर पंजाब के अलग-अलग जिलों में दो केस दर्ज हुए हैं। उन पर गैर जमानती धाराएं लगाई गई हैं।

25 अप्रैल को भाजपा में हुए थे शामिल

25 अप्रैल को पंजाब के सांसद संदीप पाठक ने अन्य सांसदों राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, विक्रमजीत साहनी, राजेंद्र गुप्ता और दिल्ली की सांसद स्वाति मालीवाल के साथ भाजपा का दामन थाम लिया था।

केजरीवाल के चाणक्य माने जाते थे पाठक

संदीप पाठक केजरीवाल के बेहद करीबी माने जाते थे। जब केजरीवाल जेल में थे तो उनसे मिलने की अनुमति तीन लोगों को थी, जिनमें एक संदीप पाठक थे। उन्होंने पंजाब चुनाव में अपनी रणनीति से ही पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिलाई थी। पंजाब चुनाव के बाद वे एक तरह से पार्टी के चाणक्य बनकर उभरे थे। इसके बाद पार्टी ने उन्हें राज्यसभा की सीट दी।

हालांकि इसके बाद उन्हें पंजाब के पार्टी प्रभारी पद से हटाकर छत्तीसगढ़ का प्रभारी बना दिया गया। उनके स्थान पर मनीष सिसोदिया को पंजाब का चुनाव प्रभारी लगाया गया। सूत्रों के अनुसार, इस बात से पाठक काफी नाराज थे। इसके अलावा 2025 में दिल्ली चुनाव में हार के बाद भी पाठक पर पार्टी के अंदर सवाल उठने लगे थे।

छत्तीसगढ़ के रहने वाले संदीप पाठक ने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से पीएचडी की हुई है। संदीप पाठक ने आईआईटी दिल्ली की नौकरी छोड़कर आम आदमी पार्टी का दामन थामा था।

राजिंदर गुप्ता की कंपनी पर पीपीसीबी ने मारा था छापा

इससे दो दिन पहले पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) ने आप छोड़ने वाले प्रमुख उद्योगपति पद्मश्री राजिंदर गुप्ता के बरनाला के गांव धौला स्थित ट्राईडेंट इंडस्ट्री की यूनिट पर छापा मारा था। इस कार्रवाई ने प्रदेश की सियासत और उद्योग जगत दोनों में हलचल पैदा कर दी है।

इसके खिलाफ ट्राईडेंट ग्रुप ने शुक्रवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में आरोप लगाया गया कि गुप्ता के राजनीतिक पाला बदलने के तुरंत बाद पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) ने बदले की भावना से फैक्टरी पर असामान्य कार्रवाई शुरू कर दी।

हाईकोर्ट ने याचिका पर पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया है और इस दौरान पीपीसीबी ने कोर्ट को विश्वास दिलाया है कि 4 मई तक कंपनी के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

अकाली दल ने उठाया सवाल

शिरोमणि अकाली दल ने संदीप पाठक पर केस दर्ज होने पर आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा है। अकाली दल के मुख्य प्रवक्ता एडवोकेट अर्शदीप सिंह क्लेर ने सवाल उठाया कि पंजाब सरकार यह बताएं कि यह भ्रष्टाचार संदीप पाठक ने आम आदमी पार्टी में रहते हुए किया था या बीजेपी ज्वाइन करने के बाद।

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Author: Farheen

सबसे ज्यादा पड़ गई

हालांकि निजी अस्पतालों की बात करें तो वहां इलाज का औसत खर्च 42,359 रुपये है, जो देश के औसत 50,508 रुपये से कम है। इसके बावजूद यह खर्च आम परिवार के लिए भारी ही साबित होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि दवाइयों, जांचों और अन्य सहायक सेवाओं पर होने वाला अतिरिक्त खर्च मरीजों की जेब पर दबाव बढ़ा रहा है। सरकारी अस्पतालों में भी पूरी तरह मुफ्त या सस्ती सुविधाएं उपलब्ध न होने के कारण लोगों को बाहर से सेवाएं लेनी पड़ती हैं, जिससे कुल खर्च बढ़ जाता है। ये आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि हरियाणा में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को और किफायती बनाने की जरूरत है ताकि लोगों पर इलाज का आर्थिक बोझ कम हो सके। साथ ही, जेब से होने वाले खर्च (आउट-ऑफ-पॉकेट एक्सपेंडिचर) को घटाने के लिए प्रभावी नीतियों की भी आवश्यकता है। चेरिटेबल अस्पतालों की स्थिति बेहतर चेरिटेबल अस्पतालों में दूसरे राज्यों व राष्ट्रीय औसत के मुकाबले खर्च आधे से भी कम है। हरियाणा में प्रति इलाज चेरिटेबल अस्पताल में औसत मेडिकल खर्च 16945 रुपये है जबकि अखिल भारतीय औसत 39,530 रुपये है। एक बार भर्ती होने पर खर्च हो जाते हैं 33,713 रुपये शहरी व ग्रामीण के सरकारी व प्राइवेट अस्पताल में ओवरआल औसतन खर्च हरियाणा में सस्ता है। आंकड़ों से पता चला कि हरियाणा में अस्पताल में भर्ती होने के हर मामले पर औसत मेडिकल खर्च 33,713 आता है, जो भारतीय औसत 34,064 रुपये से थोड़ा कम है। पंजाब में औसतन खर्च 35,703 रुपये है। जिन बीमारियों में भर्ती की जरूरत नहीं होती, उसमें भी ज्यादा खर्च कुछ ऐसी बीमारियां होती हैं जिसमें भर्ती होने की जरूरत नहीं होती, उसमें भी हरियाणा में इलाज कराना काफी महंगा है। हरियाणा में प्रति इलाज गांव में औसतन 1361 रुपये और शहर में 1464 रुपये का खर्च आता है जबकि राष्ट्रीय औसत गांव में 847 रुपये है और शहर में 884 रुपये है। यानी हरियाणा में इलाज का औसत खर्च राष्ट्रीय औसत से करीब 547 रुपये (63%) अधिक है। पड़ोसी राज्य पंजाब के गांव में औसतन खर्च 1283 रुपये और शहर में 1158 रुपये है। खाने का खर्च जोड़ने से खर्चा और बढ़ता है इलाज का खर्च सिर्फ दवा और अस्पताल तक सीमित नहीं रहता बल्कि आने-जाने और खाने का खर्च जोड़ने पर यह और बढ़ जाता है। हरियाणा में एक बार इलाज पर औसतन करीब 45,183 रुपये खर्च आता है। पूरे देश में यही औसत 41,463 रुपये है। यानी हरियाणा में लोगों को राष्ट्रीय औसत के मुकाबले करीब 3,720 रुपये (9%) ज्यादा खर्च करने पड़ते हैं। दूसरी ओर, पंजाब में भी अस्पताल में भर्ती होने पर कुल औसत खर्च 42,319 रुपये है। कारण : दवाओं व सर्जिकल आइटम की कमी से बढ़ता है खर्च पीजीआई रोहतक के पूर्व सर्जन डा. रणबीर दहिया कहते हैं कि सरकारी अस्पतालों में दवाइयां कम मिलती है। डाक्टर की लिखी पांच में से सिर्फ एक या दो दवाइयां ही अस्पताल में मिलती है। बाकी दवाइयां मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ती हैं। इसी तरह से हड्डियों के ऑपरेशन में लगने वाले इंप्लांट सरकारी अस्पताल में नहीं मिलते हैं। मरीज जब बाहर से खरीदता है तो उसका खर्च तो बढ़ जाता है। कई बार अस्पतालों में इतनी भीड़ होती है या टेस्ट की वेटिंग इतनी लंबी हो जाती है कि मरीज को प्राइवेट में जांच कराना आसान लगता है। इस वजह से खर्च बढ़ता है। इलाज के लिए बार-बार अस्पताल में आने से भी खर्च बढ़ता है। वहीं, आईएमए के पूर्व प्रधान डाॅ. अजय महाजन कहते हैं कि सरकारी अस्पतालों में अक्सर देखा जाता है कि दवाइयां और सर्जिकल सामान बाहर से मंगवाया जाता है, जिसकी वजह से खर्च बढ़ जाता है। मरीज का सबसे ज्यादा खर्च दवाइयों में होता है। किस राज्य में सरकारी अस्पताल में प्रति इलाज कितना खर्च क्रमांक राज्य / केंद्र शासित प्रदेश प्रति इलाज खर्च (₹) 1 छत्तीसगढ़ 3,913 2 दिल्ली 6,394 3 मध्य प्रदेश 4,647 4 राजस्थान 4,177 5 पंजाब 12,200 6 चंडीगढ़ 24,013