
सोनिया ने बताया कि जेल में उसने ब्यूटी पार्लर और सिलाई-कढ़ाई जैसे कोर्स किए हैं। वह रेडियो जॉकी भी बन चुकी हैं और 2021 में तिनका-तिनका बंदिनी अवॉर्ड से सम्मानित की गईं।
क्या था मामला?
वर्ष 2001 में बरवाला के पूर्व विधायक रेलुराम पूनिया (50), उनकी पत्नी कृष्णा देवी (41), बच्चे प्रियंका (14), सुनील (23), बहू शकुंतला (20), पोता लोकेश (4) और दो पोतियां शिवानी (2) व 45 दिन की प्रीति की लितानी गांव के फार्म हाउस में हत्या कर दी गई थी। इस मामले में रेलुराम की छोटी बेटी सोनिया और उसके पति संजीव को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई जिसे 6 अगस्त 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद में बदल दिया था।
कब-कब क्या हुआ?
वर्ष 2004 में हिसार जिला अदालत ने सोनिया और संजीव को फांसी की सजा सुनाई। वर्ष 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने इस सजा को बरकरार रखा। 6 अगस्त 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने दोनों की दया याचिका पर फैसला सुनाते हुए फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील करते हुए पूरी जिंदगी जेल में बिताने के आदेश दिए। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 11 दिसंबर 2025 को दोनों को अंतरिम जमानत दी और 16 दिसंबर 2025 को करनाल जेल से रिहा कर दिया।


