जांच में मुख्य आरोपियों में से एक रजत डाहरा ने पूछताछ में स्वाती तोमर का नाम उजागर किया। रजत डाहरा स्वाती को अच्छी तरह जानता और पहचानता है, जिसे इस मामले में सह-आरोपी माना जा रहा है।

पंचकूला नगर निगम एफडी घोटाले में भ्रष्टाचार के खिलाड़ी कितने शातिर थे इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सरकारी खजाने को लूटने के लिए एक मृत व्यक्ति को भी नहीं छोड़ा।
राजपुरा पहुंची पुलिस तो रह गई दंग
जांच एजेंसी (एसीबी) जब गिरफ्तार आरोपी रजत डाहरा को साथ लेकर विनोद कुमार की तलाश में पंजाब के राजपुरा पहुंची तो वहां की हकीकत देख अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई। रजत ने कुबूल किया था कि उसने विनोद कुमार के खाते में गबन की राशि ट्रांसफर की थी लेकिन जब पुलिस राजपुरा की पटेल कॉलोनी स्थित मकान नंबर 24 पर दस्तक देने पहुंची तो पता चला कि विनोद इस दुनिया में है ही नहीं। परिजनों ने बताया कि विनोद की मृत्यु हुए 18 महीने बीत चुके हैं।
मास्टर प्लान, मनी लॉन्ड्रिंग के लिए बना फ्रंट
पुलिस की जांच में साफ हो गया है कि विनोद कुमार का नाम केवल एक मुखौटे के तौर पर इस्तेमाल किया गया। आरोपियों ने जानबूझकर एक मृत व्यक्ति के खाते को चुना ताकि ट्रांजेक्शन की कड़ियां पुलिस और ऑडिट की नजरों से बची रहें।
अब इन बिंदुओं पर एसीबी कर रही जांच
- खाता किसने चलाया : विनोद की मौत के बाद उसके खाते से लेन-देन कौन कर रहा था और बैंक ने केवाईसी (केवाईसी) नियमों की अनदेखी कैसे की?
- रजत डाहरा का कुबूलनामा : उसका माना है कि वह विनोद को निजी तौर पर जानता था और उसी ने इस खाते का जुगाड़ किया था।
- पुलिस का मानना है कि ऐसे और भी कई बेनामी खाते भी हो सकते हैं, जिनके जरिये करोड़ों रुपये इधर-से-उधर किए गए।
जांच में स्वाती तोमर का नाम सामने आया
विजिलेंस ब्यूरो ने इन कड़ियों को जोड़ा
विकास कौशिक, तत्कालीन सीनियर अकाउंट ऑफिसर, जिसे रोहतक के गांव इंद्रगढ़ से गिरफ्तार किया गया।
दिलीप कुमार राघव, सेक्टर-6 पंचकूला से गिरफ्तार। इसके पास से आईफोन और अन्य डिजिटल साक्ष्य मिले हैं।
रजत डाहरा, पटियाला निवासी रजत को चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया गया। इसके घर से लैपटॉप और हार्ड डिस्क बरामद की गई है।
कपिल कुमार, राजपुरा निवासी कपिल के आईडीएफसी बैंक खाते में गबन की गई 2.36 करोड़ रुपये की सरकारी राशि ट्रांसफर होने की पुष्टि हुई है।
ई-साक्ष्य का इस्तेमाल
जांच टीम आधुनिक तकनीक का उपयोग कर रही है। आरोपी दिलीप कुमार राघव के घर की तलाशी की पूरी वीडियोग्राफी की गई है। इस वीडियोग्राफी और साक्ष्यों को ई-साक्ष्य एप पर धारा 105 बीएनएसएस के तहत अपलोड किया गया है जो अदालत में पुख्ता सबूत बनेगा।