कानपुर के आहूजा हॉस्पिटल में बिना अनुमति के किडनी ट्रांसप्लांट का खेल चल रहा था। इसमें एक साउथ अफ्रीकी महिला का भी अवैध ऑपरेशन तीन मार्च को हुआ था हुआ। सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी ने बताया कि आहूजा अस्पताल में किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा नहीं है।

कानपुर में केशवपुरम स्थित आहूजा हॉस्पिटल में करीब दो साल से अनधिकृत तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट का खेल चल रहा है। यहां दिल्ली, मेरठ, नोएडा और एनसीआर क्षेत्र से मरीजों व डोनरों काे लाकर किडनी प्रत्यारोपित की जा रही थी। इसकी जानकारी पुलिस और सीएमओ कार्यालय की टीम को प्रारंभिक जांच में हुई है। इस वर्ष तीन मार्च को साउथ अफ्रीका की महिला अरेबिका की किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था।
पुलिस आरोपियों को पकड़ने के लिए जाल बिछाए रही, जबकि मरीज व उनके रिश्तेदार शहर से कहीं और चले गए। नए केस के लिए पुलिस अधिकारियों ने स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों के साथ फिर से प्लानिंग की और आरोपियों को दबोच लिया। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि पुलिस के पास अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट की सूचना आ रही थी। क्राइम ब्रांच, एलआईयू और खुफिया की टीमों को सक्रिय किया गया।
अस्पताल के रिकार्ड में भी ब्योरा नहीं मिला
स्वास्थ्य विभाग को भी चौकन्ना किया गया था। अनधिकृत तरीके से अंग प्रत्यारोपण का खेल किस नर्सिंगहोम में हो रहा है, इसकी सटीक जानकारी नहीं आई। इसी साल तीन मार्च को साउथ अफ्रीका की महिला अरेबिका का अंग प्रत्यारोपण हुआ था। एलआईयू और क्राइम ब्रांच ने स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से जानकारी जुटाई, लेकिन महिला व उनके परिजनों का पता नहीं चल सका था। अस्पताल के रिकार्ड में भी किसी तरह की सर्जरी का ब्योरा नहीं मिला।
आहूजा हॉस्पिटल में सात किडनी प्रत्यारोपण की जानकारी
आरोपियों ने अरेबिका को कुछ दिन कल्याणपुर के नर्सिंगहोम के आईसीयू में रखा फिर दिल्ली ले गए। दिल्ली के नर्सिंगहोम के बाद नोएडा के निजी अस्पताल में डेढ़ से दो माह के लिए उनका इलाज चला। अब तक आहूजा हॉस्पिटल में सात किडनी प्रत्यारोपण की जानकारी हुई है। इस अस्पताल के कुछ स्टाफ कई अधिकृत और अनधिकृत तरीके से संचालित हो रहे कल्याणपुर, काकादेव और पनकी क्षेत्र के नर्सिंगहोम से जुड़े हुए थे। वहां से मरीजों को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर करने का खेल चल रहा था।
यूरोलॉजी के लिए अधिकृत नहीं
सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी ने बताया कि आहूजा अस्पताल में किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा नहीं है। नर्सिंगहोम और आईसीयू जरूर बने हैं लेकिन अस्पताल यूरोलॉजी के लिए अधिकृत नहीं हैं। ऐसे में गुर्दे और उससे जुड़ी सर्जरी होने का सवाल ही नहीं है। किडनी ट्रांसप्लांट करने वाली टीम अपने साथ कई औजार लेकर आती थी जबकि ऑपरेशन थियेटर के दो टेबलों का उपयोग किया जाता था।
एसबीआई में मेडिकल अफसर भी है डॉ. प्रीति आहूजा
अनधिकृत तरीके से गुर्दा प्रत्यारोपण मामले की आरोपी डॉ. प्रीति आहूजा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मेडिकल ऑफिसर भी है। साथ ही वह डॉक्टरों के विभिन्न संगठनों से जुड़ी है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की नगर शाखा की उपाध्यक्ष है। आईएमए के अलावा वह शहर के मधुमेह रोग विशेषज्ञों के संगठन कानपुर डायबिटीज एसोसिएशन (केडीए) की सचिव है। विशेषज्ञ डॉक्टरों के संगठन फिजिशियन फोरम की सदस्य है। डॉक्टर कम्युनिटी के विभिन्न सामाजिक और मेडिकल कार्यक्रमों में उसकी सहभागिता रहती है।
शहर के सर्जनों से होगी पूछताछ
आहूजा अस्पताल में अपनी सेवाएं देने वाले शहर के सर्जनों से भी पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम पूछताछ करेगी। इन सर्जन पर किडनी ट्रांसप्लांट होने के बाद रोगियों के इलाज करने और इस बात को छुपाने का आरोप है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार आहूजा अस्पताल के पास किडनी ट्रांसप्लांट करने और ट्रांसप्लांट के रोगी का इलाज करने की अनुमति नहीं होने के बावजूद इन डॉक्टरों ने उन दोनों रोगियों का इलाज किया। ऐसे में ये सभी डॉक्टर पूछताछ के दायरे में आएंगे। सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी ने बताया कि अस्पताल में आने वाले अन्य डॉक्टरों से भी बातचीत की जाएगी। उन्होंने बाद में रोगियों का इलाज किया है और जानकारी भी नहीं दी। ये डॉक्टर अस्पताल में ऑन कॉल आते थे। इसके अलावा अस्पताल में कोई भी नेफ्रोलॉजिस्ट या यूरोलॉजिस्ट नहीं आता था।
स्टाफ को छुट्टी देकर देर रात किया जाता था ट्रांसप्लांट
मसवानपुर चौराहा स्थित आहूजा हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट देर रात या सुबह के तीन से चार बजे के बीच होता था। यह वह समय था जब अधिकतर मरीज व तीमारदार नींद में होते थे। सर्जरी के बाद किडनी रोगी व डोनर को शिफ्ट करना आसान रहता था। किडनी प्रत्यारोपण वाले दिन पूरे स्टाफ को छुट्टी दे दी जाती थी। यह जानकारी पुलिस और सीएमओ कार्यालय के अधिकारियों को जांच में मिली है। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि आहूजा हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए देर रात का समय निर्धारित किया जाता था।
टीम को आरोपियों की वीडियो फुटेज नहीं मिली
इस दौरान सभी स्टाफ की छुट्टी कर दी जाती थी। केवल मेरठ और नोएडा के डॉक्टरों व पैरामेडिकल टीम रहती थी। सर्जरी के बाद किडनी रोगी और डोनर को अलग-अलग अस्पताल में भर्ती करा दिया जाता था। इस बीच अस्पताल के सीसीटीवी कैमरे भी बंद कर दिए जाते थे। पुलिस और सीएमओ कार्यालय की टीम को आरोपियों की वीडियो फुटेज नहीं मिली है। आहूजा हॉस्पिटल, मेडलाइफ और प्रिया नर्सिंगहोम में भी फुटेज नहीं मिले हैं। हालांकि आसपास लगे अन्य सीसीटीवी कैमरों ने एंबुलेंस व मरीज को शिफ्ट कराने की फुटेज मिले हैं। पुलिस ने साक्ष्य बरामद किए हैं।
अनाधिकृत पैरामेडिकल स्टाफ कर रहा था इलाज
सीएमओ की जांच में सामने आया है कि मेडलाइफ और प्रिया नर्सिंगहोम में अनाधिकृत पैरामेडिकल स्टाफ इलाज कर रहा था। उनको सादे कागज में सिर्फ पांच दिन दवाएं, इंजेक्शन, ग्लूकोज आदि की डिटेल लिखी गई थी। यह प्रक्रिया अन्य गुर्द रोगियों और डोनर में अपनाई जाती थी। अगर कोई भी केस बिगड़ता तो सिर्फ लखनऊ के एक नर्सिंगहोम में रेफर कर दिया जाता था।
सरकारी डॉक्टर कर रहे प्रैक्टिस
कल्याणपुर, पनकी, रावतपुर और काकादेव के नर्सिंगहोम की जांच में पुलिस के पास जानकारी आई है कि कई सरकारी डॉक्टर यहां पर प्रैक्टिस कर रहे हैं। उनके दलाल और जूनियर डॉक्टर सर्जरी के लिए मरीजों और डिलीवरी के लिए प्रसूताओं को प्रलोभन देते हैं। उनके लिए अच्छे खासे पैकेज तैयार किए गए हैं। मंगलवार को सीएमओ की टीम ने कई नर्सिंगहोम और निजी अस्पतालों में जांच की। वहां के ऑपरेशन थियेटर व अन्य सुविधाओं का जायजा लिया।
डायलिसिस कराने वाले मरीजों की पता करते थे हैसियत
कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट से जुड़े आरोपी हमेशा उन लोगों की तलाश करते जिन्हें या तो रुपयों की सख्त हो या फिर किडनी की। रुपये के जरूरतमंदों की जानकारी के लिए नौकरी पेशा लोग या छात्रों को निशाना बनाया जाता। वहीं, किडनी किसकी खराब है और कितनी खराब है इसके बारे में उन अस्पतालों से जानकारी जुटाई जाती। जहां लोग डायलिसिस कराने जाते हैं वहीं से मरीजों का पता लेकर आरोपी उनके बारे में पूरी जानकारी जुटाते थे। उनकी हैसियत देखकर उनसे किडनी के लिए संपर्क करते थे।
