संजय भाटिया ने लोकसभा चुनाव में रचा था इतिहास संजय भाटिया कुरुक्षेत्र विश्वविद्याल ग्रेजुएट हैं। इनका जन्म हरियाणा के पानीपत जिले में हुआ है। वह भाजपा के महामंत्री भी रह चुके हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी संजय भाटिया ने अपने पहले ही लोकसभा चुनाव में इतिहास रच दिया था। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को 6.54 लाख मतों के अंतर से मात दी थी। संजय भाटिया ने प्रदेश के 53 साल के इतिहास में सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी। उन्हें कुल 909432 वोट मिले थे। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी कुलदीप शर्मा को 654269 वोटों के अंतर से हराया था। राहुल गांधी ने दिया था कर्मवीर के नाम का सुझाव वहीं कर्मवीर सिंह बौद्ध किसी भी गुट या खेमे से जुड़े हुए नेता नहीं माने जाते। यही कारण है कि उन्हें संगठन के भीतर एक संतुलित और सर्व स्वीकार्य चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। वे ‘संविधान बचाओ अभियान’ में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं और जमीनी स्तर पर पार्टी के कार्यक्रमों में भागीदारी निभाते रहे हैं। एससी समुदाय से आने वाले कर्मवीर सिंह बौद्ध सामाजिक संतुलन के नजरिये से भी एक अहम दावेदार है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने स्वयं उनके नाम का सुझाव दिया है। अंबाला के मुलाना विधानसभा में रहने वाले कर्मवीर सिंह प्रशासकीय अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं और लंबे समय से कांग्रेस से जुड़कर कार्य कर रहे थे। कांग्रेस ने उन्हें हिमाचल प्रदेश में एससी सेल का प्रभारी भी बनाया था। राष्ट्रीय स्तर पर वह कन्वीनर भी हैं।

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राज्यसभा चुनाव से पहले हरियाणा में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। राज्य में कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने अनदेखी के कारण पार्टी को छोड़ने का फैसला किया है। डिटेल में पढ़ें खबर.

Teluram Jangra announced his decision to leave the Congress party

हरियाणा ओबीसी कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष तेलूराम जांगड़ा ने  कांग्रेस छोड़ने का एलान किया है। राज्यसभा चुनाव में ओबीसी वर्ग को टिकट न देने पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए कांग्रेस छोड़ी है। इस संदर्भ में उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष को अपना त्यागपत्र भी भेज दिया है। उन्होंने यह भी घोषणा की है कि वह भविष्य में किसी अन्य राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़ेंगे।

 

30 साल से कांग्रेस में थे तेलूराम जांगड़ा

तेलूराम जांगड़ा पिछले 30 वर्षों से कांग्रेस में थे। वह कांग्रेस सरकार के दौरान वर्ष 2011 में हरियाणा पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य भी बने थे, करीब 6 वर्ष तक का उनका कार्यकाल था। इसके बाद वह कांग्रेस में ही रहे। तेलु राम जांगड़ा का कहना है कि ओबीसी वर्ग की लगातार अनदेखी की जा रही है। उन्हें उम्मीद थी कि हरियाणा में जिन दो सीटों पर राज्यसभा चुनाव होना है उनमें कांग्रेस अपना प्रत्याशी ओबीसी वर्ग से चुनेगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

 

कहा- ओबीसी वर्ग की हो रही अनदेखी 

ओबीसी वर्ग से टिकट न देकर एससी वर्ग से जुड़े कर्मवीर सिंह बौद्ध को टिकट दी गई जिसके चलते उन्होंने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दिया है। उनका कहना है कि वह इस तरह की अनदेखी और नहीं सहन कर सकते थे। इसलिए उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया व साथ ही पार्टी भी छोड़ दी है। उन्होंने बताया कि वह भविष्य में किसी भी पार्टी में शामिल नहीं होंगे। अब केवल समाज सेवा के रूप में कार्य करेंगे।

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Author: admln