पिछले छह महीनों में पुलिस प्रतिष्ठानों, निजी आवासों, धार्मिक स्थलों और राजनीतिक हस्तियों को निशाना बनाकर 16 ग्रेनेड हमलों की घटनाएं सामने आईं। इनका सिलसिला अक्तूबर 2024 से अप्रैल 2025 तक जारी रहा।

पंजाब में इन दिनों बम धमाकों की अफवाहों और धमकी भरे ईमेलों ने भय का माहौल बना दिया है। एक ओर स्कूलों, सरकारी इमारतों और अदालत परिसरों को उड़ाने की धमकियां मिल रही हैं, वहीं दूसरी ओर वास्तविक बरामदगियां, ग्रेनेड हमले और आतंकी मॉड्यूल का खुलासा सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।
पुलिस महानिदेशक गौरव यादव ने स्पष्ट किया है कि पंजाब में अशांति फैलाने के लिए सीमा पार से साजिश रची जा रही है। पिछले छह महीनों में पुलिस प्रतिष्ठानों, निजी आवासों, धार्मिक स्थलों और राजनीतिक हस्तियों को निशाना बनाकर 16 ग्रेनेड हमलों की घटनाएं सामने आईं। इनका सिलसिला अक्तूबर 2024 से अप्रैल 2025 तक जारी रहा।
29 नवंबर 2024 को अमृतसर के गुरबख्श नगर की पुलिस चौकी पर ग्रेनेड फेंका गया। इसके तीन दिन बाद नवांशहर (एसबीएस नगर) में अंसारो पुलिस चौकी पर हमला हुआ। अमृतसर, बटाला, गुरदासपुर और जालंधर जैसे सीमावर्ती जिलों में सामने आई घटनाएं संकेत देती हैं कि सीमा क्षेत्र को अस्थिर करने की कोशिशें लगातार जारी हैं।
स्कूलों को निशाना, पीएम दौरे से पहले धमकी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित पंजाब दौरे से पहले चंडीगढ़ के 30 स्कूलों को धमकी भरे ईमेल भेजे गए। ईमेल में चंडीगढ़ खालिस्तान है जैसी आपत्तिजनक बातें लिखी गईं और राष्ट्रगान की जगह अन्य धार्मिक पंक्तियां गाने की चेतावनी दी गई।
मोहाली के कई निजी स्कूलों को भी बम से उड़ाने की धमकी मिली। एहतियातन छात्रों और स्टाफ को बाहर निकाला गया, बम निरोधक दस्तों ने तलाशी ली और छुट्टी घोषित करनी पड़ी। अन्य शहरों में भी इसी तरह की झूठी धमकियों ने आम लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ा दी।
सचिवालय और अदालत तक पहुंचा डर
चंडीगढ़ में पंजाब सिविल सचिवालय को भी ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी दी गई। पूरे परिसर को सुरक्षा घेरे में लेकर एंटी-सैबोटाज जांच की गई। फिरोजपुर अदालत परिसर में भी बम की अफवाह से दिनभर अफरातफरी का माहौल रहा।
सेवानिवृत्त एसपी सर्बजीत राय के अनुसार यह ‘साइकोलॉजिकल वॉरफेयर’ का हिस्सा हो सकता है, जिसमें बिना विस्फोट के भी डर फैलाकर प्रशासनिक संसाधनों पर दबाव बनाया जाता है। उनका कहना है कि ऐसे अलर्ट से पुलिस बल पर मानसिक दबाव बढ़ता है, हालांकि पंजाब पुलिस लंबे समय से ऐसे हालात से जूझती रही है। उनका तर्क है कि पंजाब पुलिस बहादुर फोर्स है, ऐसे हालात से लंबे समय से निपटती आ रही है। यह धमकियां किसी वास्तविक आतंकी हमले की योजना के बजाय सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने और दहशत फैलाने का एक लो-एफर्ट, हाई-इम्पैक्ट तरीका है।
विदेशी सर्वर, वीपीएन और अलगाववादी नाम
जांच में सामने आया है कि अधिकांश धमकी भरे ईमेल विदेशी सर्वरों से भेजे गए। पुलिस के अनुसार बांग्लादेश (ढाका), अमेरिका, फ्रांस और लंदन से जुड़े आईपी एड्रेस सामने आए हैं। अपराधी अपनी पहचान छिपाने के लिए वीपीएन और डार्क नेट का सहारा ले रहे हैं।
डीजीपी गौरव यादव ने हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में बांग्लादेश कनेक्शन की पुष्टि करते हुए बताया कि मोहाली के स्कूलों को भेजे गए ईमेल की आईपी एड्रेस ढाका से जुड़ी पाई गई। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी धमकियां अफवाह साबित हुई हैं, लेकिन हर इनपुट को गंभीरता से लेकर जांच की जा रही है।
कई धमकियों में प्रतिबंधित संगठनों के नाम, पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या का संदर्भ और जेल में बंद गैंगस्टरों का जिक्र भी किया गया।
बड़ी साजिश नाकाम, आरडीएक्स आधारित आईईडी बरामद
अफवाहों के बीच पंजाब पुलिस ने एक बड़ी आतंकी साजिश नाकाम करने का दावा किया है। स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल ने राहुल कुमार उर्फ गज्जू को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से आरडीएक्स आधारित आईईडी और विस्फोटक सामग्री बरामद की।
डीजीपी के अनुसार आरोपी पाकिस्तान में बैठे हैंडलर के निर्देश पर काम कर रहा था और एन्क्रिप्टेड ऐप के जरिए संपर्क में था। आईईडी को पीवीसी पाइप में छिपाया गया था। खुफिया सूचना के आधार पर जाल बिछाकर आरोपी को पकड़ा गया।
इसके अलावा काउंटर इंटेलिजेंस टीम ने दोआबा क्षेत्र से रॉकेट लॉन्चर बरामद कर नेटवर्क ध्वस्त करने का दावा किया। टांडा और कपूरथला से भी गिरफ्तारियां हुईं।
आंकड़े बताते हैं खतरे की गंभीरता
पंजाब पुलिस की 2025 रिपोर्ट के अनुसार 12 बड़े आतंकी मामलों का खुलासा किया गया, 19 मॉड्यूल ध्वस्त किए गए और 131 संदिग्ध गिरफ्तार किए गए।
सुरक्षा एजेंसियों ने 11.62 किलोग्राम आरडीएक्स, 54 से अधिक हैंड ग्रेनेड, 12 आईईडी, 32 डेटोनेटर, 188 रिवॉल्वर और 9 राइफलें बरामद कीं। सीमावर्ती क्षेत्रों में ड्रोन के जरिए हथियार गिराने की कोशिशों का भी खुलासा हुआ।
तब और अब: बदला खतरे का तरीका
एक दौर था जब पंजाब में वास्तविक धमाके होते थे और जांच भौतिक साक्ष्यों पर आधारित होती थी। आज बड़े धमाके कम हैं, लेकिन अफवाहों और साइबर माध्यम से डर फैलाने की कोशिशें अधिक दिख रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह लो-एफर्ट, हाई-इम्पैक्ट रणनीति हो सकती है—जहां बिना विस्फोट के भी दहशत फैलाई जाती है।
पंजाब ने अतीत में कठिन दौर देखा है और उससे उबरकर मजबूती हासिल की है। 2025-26 की घटनाएं जहां चेतावनी देती हैं, वहीं सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता राहत का संकेत भी देती है। फिलहाल सवाल यही है—क्या यह केवल अफवाहों का शोर है या किसी बड़ी साजिश की आहट?
क्या अलग-अलग घटनाएं या बड़ा पैटर्न?
डीएवी यूनिवर्सिटी की पूर्व वीसी डॉ. जसबीर के अनुसार सवाल यह है कि क्या मौजूदा घटनाएं बिखरी कड़ियां हैं या किसी बड़ी साजिश का हिस्सा? क्या अफवाहें असली खतरे से ध्यान भटका रही हैं, या सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता से बड़े हमले टल रहे हैं? पंजाब पहले भी कठिन दौर से उबर चुका है।
बम अफवाहों में बांग्लादेश कनेक्शन उजागर
पंजाब के पुलिस महानिदेशक गौरव यादव ने बम अफवाहों की जांच में बांग्लादेश कनेक्शन की पुष्टि की है। 19 फरवरी 2026 को जालंधर में प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने बताया कि स्कूलों, अस्पतालों और सचिवालय को भेजे गए धमकी भरे ईमेल के सर्वर बांग्लादेश में ट्रेस हुए हैं। मोहाली के स्कूलों को भेजे गए ईमेल की आईपी एड्रेस भी ढाका से जुड़ी पाई गई। उन्होंने कहा कि मकसद दहशत फैलाना है। हालांकि धमकियां अफवाह साबित हुईं, फिर भी पुलिस हर इनपुट पर एंटी-सैबोटेज जांच कर रही है।