बांग्लादेश में किन हालात में हो रहे चुनाव: पहले से कितनी बदली है स्थिति; हिंदुओं के पास क्या विकल्प?

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बांग्लादेश में मौजूदा परिदृश्य कैसा है? यहां चुनावी ढांचा कैसा है? यहां कितने राजनीतिक दल हैं और कितने चुनाव लड़ रहे हैं? इनमें प्रमुख पार्टियां कौन सी हैं? बांग्लादेश में बीते चुनावों के क्या नतीजे रहे थे? बीते वर्षों में और अब के चुनावों में मुख्य तौर पर क्या अंतर आया है? आइये जानते हैं…

बांग्लादेश में मजबूत हो रहे इस्लामी संगठन

बांग्लादेश में आज (12 फरवरी) को आम चुनाव कराए जा रहे हैं। बांग्लादेश का ये चुनाव बिल्कुल अलग परिदृश्य में कराया जा रहा है। जहां देश पर दो दशक तक शासन करने वाली शेख हसीना अब अपदस्थ होकर भारत में निर्वासित हैं तो वहीं उनकी पार्टी आवामी लीग को बांग्लादेश में चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया गया है। उनके अलावा बांग्लादेश की राजनीति का दूसरा अहम चेहरा- खालिदा जिया का भी कुछ दिन पहले निधन हो गया। इस बार चुनाव में उनकी पार्टी की कमान उनके बेटे तारिक रहमान संभाल रहे हैं। वहीं, कुछ और नए दलों की राजनीति में एंट्री हुई है। यानी बांग्लादेश के लिए अब आगे की राजनीति भी कुछ नए चेहरों के नेतृत्व में होगी।

1. सामाजिक-आर्थिक स्थिति

बांग्लादेश को 1971 में आजादी मिली थी। तबसे लेकर अब तक देश ने लोकतंत्र से लेकर तानाशाही और फिर तानाशाही से लोकतंत्र तक का सफर देखा। इस दौरान बांग्लादेश की आर्थिक और सामाजिक स्थिति तेजी से बदली। खासकर खालिदा जिया और शेख हसीना के दौर में बांग्लादेश तेजी से एक निर्यात हब के रूप में स्थापित हुआ। इसका असर यह हुआ कि बांग्लादेश इस वक्त पाकिस्तान से तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था है। बांग्लादेश बैंक की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, जून 2025 को खत्म हुए वित्तीय वर्ष में बांग्लादेश की विकास दर 3.97 प्रतिशत दर्ज हुई थी, जो कि बीते साल के 4.22 फीसदी से कम रही।

2. राजनीतिक स्थिति

बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति 12 फरवरी को होने वाले 13वें राष्ट्रीय संसदीय चुनावों के इर्द-गिर्द रची-बसी है। दरअसल, इन चुनावों को प्रधानमंत्री शेख हसीना के शासन के पतन के बाद कराया जा रहा है। ऐसे में इन चुनावों को युवा नेतृत्व के लिए अहम करार दिया जा रहा है।

चुनावी बदलाव और अंतरिम नेतृत्व
अगस्त 2024 में छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन के कारण शेख हसीना को पद छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी थी। तब से मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम प्रशासन देश का संचालन कर रहा है।

इस चुनाव की सबसे बड़ी बात यह है कि शेख हसीना की पार्टी, अवामी लीग का पंजीकरण निलंबित कर दिया गया है, जिससे वह चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार नहीं उतार सकी।

प्रमुख राजनीतिक दल और गठबंधन 
आवामी लीग की गैरमौजूदगी में चुनाव में मुख्य मुकाबला बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधनों के बीच है। तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी खुद को एक राष्ट्रवादी विकल्प के रूप में पेश कर रही है। वहीं, कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी ने 2024 के विद्रोह के छात्र नेताओं द्वारा बनाई गई पार्टी नेशनल सिटीजन पार्टी  के साथ गठबंधन किया है।

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3. मतदाताओं की स्थिति
बांग्लादेश इस वक्त दुनिया के सबसे युवा आबादी वाले देशों में से है। यहां बड़ी संख्या में लोग 30 साल से नीचे के हैं।

अब जानें- बांग्लादेश में कैसे चुनी जाती है सरकार, क्या है ढांचा?

बांग्लादेश के संविधान के तहत यह देश एक संसदीय प्रणाली के तहत चलता है, जहां कार्यकारी शक्तियां चुनी हुई सरकार के पास होती हैं। इसका नेतृत्व प्रधानमंत्री और उनका चुना हुआ मंत्रिमंडल करता है। यह व्यवस्था काफी हद तक भारत की तरह ही है। बांग्लादेश में भी राष्ट्रपति औपचारिक तौर पर राष्ट्राध्यक्ष होता है और उन्हें पांच साल के लिए संसद द्वारा चुना जाता है।

बांग्लादेश में जनता आम चुनाव के दौरान सांसदों को चुनती है, जो कि अलग-अलग राजनीतिक दलों से वास्ता रखते हैं या निर्दलीय होते हैं। जिस भी दल के सबसे ज्यादा सांसद जीतते हैं, वही दल बांग्लादेश में सरकार बनाने का दावेदार होता है। आमतौर पर सबसे ज्यादा सीटें जीतने वाले दल या गठबंधन का नेता प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जाता है। यही प्रधानमंत्री मंत्रिमंडल नियुक्त करता है, सरकार की नीतियों का निर्धारण करता है और नागरिक सेवाओं-विदेश नीति तय करता है।

बांग्लादेश में यूं तो संसद में कुल 350 सीटें निर्धारित हैं। हालांकि, इनमें से सीधे तौर पर 300 सीटों के लिए चुनाव होते हैं। यानी बहुमत का आंकड़ा 151 ही है। संसद की बाकी 50 सीटों का बंटवारा आम चुनाव के बाद होता है। यह 50 सीटें सभी दलों में आम चुनाव में उन्हें मिली सीटों के अनुपात में बांटी जाती हैं। सभी सांसदों का कार्यकाल पांच साल का होता है।

प्रशासनिक स्तर पर देखें तो बांग्लादेश कुल आठ संभागों में बंटा है और इसमें 64 जिले और 495 उपजिला (परिषद) हैं। इनके लिए चुनावों और शासन की अलग व्यवस्थाएं भी हैं। हालांकि, स्थानीय सरकारें फंड्स और अहम फैसलों के लिए केंद्रीय सरकार पर निर्भर हैं।

बांग्लादेश में कितने राजनीतिक दल, कौन सी पार्टियां अहम?

बांग्लादेश के निर्वाचन आयोग के मुताबिक, इस चुनावी साल में देश में कुल 59 पंजीकृत राजनीतिक दल हैं। इनमें आवामी लीग का नाम शामिल नहीं है, क्योंकि इस पार्टी पर अंतरिम यूनुस सरकार ने प्रतिबंध लगा दिए हैं। ऐसे में आवामी लीग के बैनर तले कोई भी नेता चुनाव नहीं लड़ रहा।

कुल 59 रजिस्टर्ड पार्टियों में से इस बार 51 दल ही चुनाव लड़ रहे हैं। बांग्लादेश में इस बार कुल 1981 उम्मीदवार उतरे हैं। इनमें से 249 निर्दलीय हैं।

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Author: Farheen