महिला ने पठानकोट पुलिस को शिकायत दी थी कि कैेप्टन पुलकित खेड़ा ने शादी का वादा कर उसके साथ संबंध बनाए और बाद में शादी से मुकर गया। हाईकोर्ट ने इस मामले को कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग का प्रतीक बताया।

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि सहमति से बने प्रेम संबंध यदि बाद में टूट जाएं तो केवल इसी आधार पर दुष्कर्म का मामला नहीं बनता। कोर्ट ने भारतीय सेना के अधिकारी कैप्टन पुलकित खेड़ा के खिलाफ दुष्कर्म और धोखाधड़ी के आरोप में पठानकोट में दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया।
एफआईआर 25 अगस्त, 2020 को डिवीजन नंबर-1 थाना, पठानकोट में दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि वह फेसबुक के जरिये कैप्टन खेड़ा से संपर्क में आई और धीरे-धीरे दोनों के बीच घनिष्ठ संबंध बन गए। महिला ने दावा किया कि आरोपी ने शादी का वादा करके शारीरिक संबंध बनाए और बाद में शादी से इन्कार किया जिससे उसकी मानसिक स्थिति और सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान हुआ।
कैप्टन खेड़ा की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गई कि दोनों के बीच संबंध पूरी तरह आपसी सहमति से थे। दोनों की रोका सेरेमनी भी हुई थी। याचिका में कहा गया कि केवल रिश्ता टूटने के आधार पर आपराधिक मामला नहीं बनाया जा सकता। शिकायतकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि आरोपी ने महिला को भावनात्मक रूप से बहलाकर शारीरिक संबंध बनाए और बाद में शादी से इन्कार कर जीवन से खिलवाड़ किया। राज्य सरकार ने भी कहा कि एफआईआर और जांच सामग्री प्रथम दृष्टया अपराध दर्शाती है।
मामला कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग का प्रतीक
कोर्ट ने तथ्यों का विश्लेषण करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता एक वयस्क और शिक्षित महिला है जो अपने फैसलों से परिचित थी। सहमति से बना रिश्ता यदि बाद में टूट जाए तो इसे दुष्कर्म नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसा साबित नहीं हुआ कि आरोपी ने शुरुआत से ही धोखे से शादी का वादा किया था। अदालत ने कहा कि यह मामला कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग का प्रतीक है।
