मरीजों के परिजनों को अब ब्लड के लिए भटकना नहीं होगा। औषधि नियंत्रण संगठन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित ‘ई-रक्तकोष’ पोर्टल पर रजिस्टर्ड ब्लड बैंकों के स्टॉक की रियल-टाइम जानकारी उपलब्ध है। ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक के अनुसार, सभी निजी व सरकारी ब्लड बैंकों को नियमित स्टॉक अपडेट करना अनिवार्य है।

अस्पतालों में सर्जरी या इमरजेंसी के दौरान मरीजों के परिजनों के लिए सबसे बड़ी चुनौती ब्लड की व्यवस्था करना होती है। अक्सर सही जानकारी न होने के कारण परिजनों को एक ब्लड बैंक से दूसरे ब्लड बैंक के चक्कर काटने पड़ते हैं। इस समस्या के समाधान के लिए औषधि नियंत्रण संगठन और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित ‘ई-रक्तकोष’ (e-RaktKosh) पोर्टल वरदान साबित हो रहा है।
कैसे काम करता है यह सिस्टम?
आमतौर पर लोग रक्त की जरूरत पड़ने पर दूसरों पर निर्भर रहते हैं या सोशल मीडिया पर मैसेज डालते हैं। लेकिन अब ई-रक्तकोष पोर्टल के माध्यम से प्रक्रिया बेहद आसान हो गई है। आप सीधे उस ब्लड बैंक तक पहुँच सकते हैं जहाँ रक्त उपलब्ध है, जिससे आपात स्थिति में मरीज को समय पर इलाज मिल पाता है।
सभी पंजीकृत ब्लड बैंकों को नियमित रूप से अपना स्टॉक अपडेट करना अनिवार्य किया गया है। जयपुर सहित प्रदेश के सरकारी और निजी अस्पतालों से जुड़े ब्लड बैंक इस पोर्टल से जुड़े हुए हैं। देखने में आता है कि अस्पताल में भर्ती मरीज को रक्त की जरूरत पड़ने अन्य लोगों पर निर्भर रहना पड़ता है,लेकिन अब ई-रक्त पोर्टल से यह प्रक्रिया काफी आसान हो गई है। इस पोर्टल को सड़क हादसे, ऑपरेशन, डिलीवरी और गंभीर बीमारियों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है जिससे जरूरतमंद को ब्लड ग्रुप की रीयल टाइम जानकारी मिलती है, जो आपात स्थिति में बेहद उपयोगी है। सही जानकारी मिलने से परिजन सीधे उसी ब्लड बैंक तक पहुंच सकते हैं जहां रक्त उपलब्ध हो,पोर्टल पर आवश्यक ब्लड ग्रुप चुनते ही यह देख सकते है कि कितनी यूनिट उपलब्ध है। इससे समय की बचत के साथ-साथ भागदौड और मानसिक उनाव भी कम होता है।
अजय फाटक- ड्रग कंट्रोलर



