जिले में महिलाओं के स्मार्टफोन उपयोग पर पंचायत स्तर पर लगाए गए प्रतिबंध के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने गंभीर रुख अपनाते हुए जिला कलेक्टर प्रदीप के. गावंडे को नोटिस जारी किया है। आयोग ने 14 दिनों के भीतर पूरे प्रकरण की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

हाल ही में चौधरी समाज की एक बैठक में कथित रूप से महिलाओं के स्मार्टफोन उपयोग पर पाबंदी लगाने के मामले ने प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर हलचल मचा दी है। यह बैठक 21 दिसंबर को सुंधामाता पट्टी के गाजीपुरा गांव में आयोजित हुई थी, जिसकी अध्यक्षता समाज के अध्यक्ष सुजनाराम चौधरी ने की थी। बैठक में 14 पट्टियों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में यह निर्णय लिया गया कि 15 गांवों की बहू-बेटियां स्मार्टफोन का उपयोग नहीं करेंगी और केवल साधारण कीपैड फोन ही रख सकेंगी, साथ ही सार्वजनिक कार्यक्रमों या पड़ोस में जाने के दौरान स्मार्टफोन ले जाने पर भी रोक लगाई गई थी।
मानवाधिकार आयोग ने अपने नोटिस में स्पष्ट किया है कि किसी भी पंचायत या सामाजिक समूह को महिलाओं के संचार के साधनों पर रोक लगाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है और तकनीक तक पहुंच महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा और सशक्तिकरण से जुड़ा अहम विषय है। जिला कलेक्टर प्रदीप के. गावंडे ने नोटिस मिलने की पुष्टि करते हुए बताया कि मामले की गहन जांच कर आयोग को समयबद्ध रिपोर्ट भेजी जाएगी। इस प्रकरण के बाद पूरे जिले में चर्चा का माहौल है और सभी की निगाहें अब प्रशासन की रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।