केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को गुजरात के भुज में सीमा सुरक्षा बल के हीरक जयंती समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा, आने वाला एक साल बीएसएफ के पूर्ण आधुनिकीकरण को समर्पित होगा।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को गुजरात के भुज में सीमा सुरक्षा बल के हीरक जयंती समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा, आने वाला एक साल बीएसएफ के पूर्ण आधुनिकीकरण को समर्पित होगा। उसके बाद का एक साल हमारे वीर जवानों और उनके परिजनों के कल्याण को पूरी तरह समर्पित होगा। इस दौरान बीएसएफ और केन्द्रीय गृह मंत्रालय अनेक योजनाओं के साथ जवानों और उनके परिजन के कल्याण की दिशा में कदम उठाएगा। गृह मंत्रालय ने संकल्प लिया है कि बीएसएफ को अगले पांच साल में विश्व का सबसे आधुनिक सीमा सुरक्षा बल बनाएंगे। उन्होंने कहा कि आगामी दिनों में हम अनेक योजनाएं लाने वाले हैं। वह मुश्किल हालात में सीमा पर तैनात जवानों के परिजन को आश्वस्त करना चाहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार आपके कल्याण में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।
गृह मंत्री ने कहा, पिछले छह वर्षों में सीमा सुरक्षा बल ने न केवल देश की जनता, बल्कि पूरे विश्व को यह मानने के लिए मजबूर किया है कि जब तक बीएसएफ है, दुश्मन भारत की एक इंच भूमि पर नजर नहीं डाल सकता। सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने वीरता, दक्षता के साथ और प्राणों की भी परवाह किए बगैर, अपने प्राणों की आहूति देकर फर्स्ट रेस्पोंडेंट होने की जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन किया है, जो देश के गृह मंत्री के तौर पर मेरे लिए बहुत गौरव और अभिमान की बात है। वह सीमा सुरक्षा बल के जवानों को बताना चाहते हैं कि न केवल प्रधानमंत्री और गृह मंत्री, बल्कि पूरा देश आपकी वीरता को सलाम करता है। आपकी दक्षता पर अटूट भरोसा करता है और देश की रक्षा करने के आपके अटूट संकल्प के कारण चैन की नींद सोता है, जो किसी भी बल के लिए गौरव का विषय है।
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि अब तक सीमा सुरक्षा बल के 2,013 बहादुर जवानों ने देश की सीमाओं को अखंड एवं सुरक्षित रखते हुए अपने प्राणों की सर्वोच्च आहुति दी है। उन्होंने कहा कि न केवल सीमा-रक्षा में, बल्कि संयुक्त राष्ट्र के अनेक शांति मिशनों में तथा देश के भीतर उत्पन्न कितनी ही आपात स्थितियों में, चाहे आतंकवाद का मुकाबला करना हो या चाहे नक्सलवाद के उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य को साकार करना हो, बीएसएफ के जवानों ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने सदा कर्तव्य को सर्वोपरि मानते हुए आगे बढ़कर काम किया है। इसी का परिणाम है कि आज देश की पूर्वी तथा पश्चिमी सीमाएं अटल, अडिग और पूर्णतः सुरक्षित हैं। इसका सबसे बड़ा श्रेय बीएसएफ के वीर जवानों को जाता है।
1 दिसम्बर 1965 को सीमा सुरक्षा बल की स्थापना के समय से ही यह बल सभी ऊंचाइयों को प्राप्त करने में सफल रहा है। उन्होंने कहा कि सभी केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में बीएसएफ ही एकमात्र ऐसा बल है जो थल, जल और गगन, तीनों सीमाओं पर देश की सुरक्षा में समर्पित रहता है। उन्होंने कहा कि चाहे हमारे देश की वायु सीमा हो, चाहे दुर्गम से दुर्गम भूमि सीमा हो और चाहे अनेक प्रकार की बाधाओं के बीच में जल सीमा हो, तीनों की सुरक्षा में बीएसएफ के जवान तैनात रहते हैं। जल, थल, गगन, तीनों जगह बीएसएफ का एक ही लक्ष्य रहा है और वह है भारत की सुरक्षा। उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि आज 193 बटालियनों और 2.76 लाख से अधिक जवानों की ताकत के साथ बीएसएफ पाकिस्तान से सटी 2,279 किमी और बांग्लादेश से सटी 4,096 किमी लंबी सीमा की पूरी सुरक्षा और निगरानी कर रही है।
अमित शाह ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान हमारी सेना ने जैश-ए-मौहम्मद, हिज़्बुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैयबा के 9 स्थानों पर स्थापित मुख्यालय, ट्रेनिंग कैंप, और उनके लॉन्च पैड को नष्ट किया। इस ऑपरेशन का उद्देश्य आतंकवाद का खात्मा, हमारे नागरिकों की सुरक्षा, और सीमावर्ती क्षेत्र की सुरक्षा था। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन के दौरान हमारे सब-इंस्पेक्टर मोहम्मद इम्तियाज अहमद और सिपाही दीपक ने सर्वोच्च बलिदान दिया, अद्वितीय वीरता का परिचय दिया और वह उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी बीएसएफ की अनेक उपलब्धियां हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सुरक्षा एजेंसियों के पराक्रम से देश 31 मार्च 2026 तक पूरी तरह नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा।
गृह मंत्री ने कहा कि हमने पिछले वर्षों में सीमा पर फेंसिंग को अभेद्य बनाने का काम तेजी से किया है। अब फेंसिंग से जुड़े अधिकांश ट्रायल पूरे हो चुके हैं। आने वाले दिनों में हम ‘ई-बॉर्डर सिक्योरिटी’ का नया कॉन्सेप्ट लेकर आ रहे हैं। इस क्रांतिकारी कॉन्सेप्ट को धरातल पर उतारने में बीएसएफ की सबसे बड़ी भूमिका है और इसका शुरुआती इनिशिएटिव भी बीएसएफ ने ही लिया है। आने वाले एक साल में इसे जमीन पर पूरी तरह लागू करने के लिए हरसंभव प्रयास होंगे और मुझे पूरा विश्वास है कि अगले पाँच वर्षों में हमारी देश की सम्पूर्ण भू-सीमा ई-सुरक्षा के मजबूत घेरे में होगी।
