कानपुर के सचेंडी क्षेत्र से रिश्तों को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहां लालेपुर निवासी शिवबीर (45) की गुमशुदगी की गुत्थी आखिरकार हत्या में बदल गई। पुलिस ने खुलासा किया कि उनकी पत्नी लक्ष्मी और भांजा अमित ने मिलकर दस माह पहले ही उसकी हत्या कर शव को खेत में दफना दिया था।

ऐसे खुला राज
दरअसल, शिवबीर की मां सावित्री देवी ने छह मई 2025 को सचेंडी थाने में बेटे के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि 30 अक्टूबर 2024 को वे बांदा गई थीं और पांच सितंबर 2025 को लौटने पर बहू लक्ष्मी ने उन्हें झूठा बहाना दिया कि शिवबीर नौकरी की तलाश में गुजरात चला गया है। लंबे समय तक कोई खबर न मिलने और लक्ष्मी के बार-बार बदले हुए जवाबों पर संदेह गहराया।
गांव में पूछताछ करने पर लक्ष्मी और उसके भांजे अमित के बीच अवैध संबंधों की बात सामने आई। पुलिस ने दोनों को हिरासत में लिया और जब मोबाइल की कॉल डिटेल सामने रखी गई तो आखिरकार दोनों ने 2 नवंबर 2024 की रात हत्या की वारदात स्वीकार कर ली।
नशे की गोली और लोहे की रॉड से हत्या
अमित ने बताया कि लक्ष्मी ने चाय में नशे की गोली मिलाकर शिवबीर को सुला दिया था। फिर उसके सो जाने पर सिर पर साबड़ और रॉड से तीन वार कर हत्या कर दी गई। इसके बाद शव को घर के पीछे खेत में गाड़ दिया गया और जल्दी सड़ने के लिए उस पर नमक डाल दिया। कुछ समय बाद कुत्तों ने अस्थियां बाहर निकाल दीं, तो दोनों ने हड्डियों को बोरे में भरकर पनकी नहर में फेंक दिया।
बच्चों ने देखा, पर चुप करा दिए गए
हत्या के दौरान शोर सुनकर लक्ष्मी की 13 वर्षीय बेटी और आठ वर्षीय बेटे की नींद खुल गई थी। लेकिन लक्ष्मी ने उन्हें बहला-फुसलाकर शांत करा दिया। उस समय 18 वर्षीय बड़ा बेटा घर पर मौजूद नहीं था।
पुलिस जांच और सबूत
पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल किए गए साबड़ और फावड़ा घर से बरामद कर लिया। दोनों आरोपियों को उस खेत में भी ले जाया गया जहां शव को गाड़ा गया था। फॉरेंसिक टीम ने वहां से हड्डियों के अवशेष, विशेषकर शिवबीर की उंगलियों की हड्डियां बरामद कीं।
सचेंडी इंस्पेक्टर दिनेश सिंह बिष्ट ने बताया कि लक्ष्मी (40) और अमित (25) को हिरासत में लेकर आगे की कार्रवाई की जा रही है। अमित हाथ से दिव्यांग है, लेकिन इसके बावजूद उसने इस खौफनाक वारदात में सक्रिय भूमिका निभाई।