NISAR: निसार मिशन की कमीशनिंग प्रक्रिया शुरू, 90 दिन का ये चरण बेहद अहम|

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नासा में प्राकृतिक आपदा अनुसंधान के कार्यक्रम प्रबंधक  गेराल्ड डब्ल्यू बावडेन ने बताया कि ‘निसार को 737 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया गया है और हमें वास्तव में इसे 747 किलोमीटर तक ऊपर उठना होगा और इस काम को पूरा होने में लगभग 45-50 दिन लगेंगे।’

isro nasa joint mission NISAR mission enters critical 90-day commissioning phase

विस्तार

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा और भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के ऐतिहासिक सहयोग से तैयार सैटेलाइट NISAR सफलतापूर्वक सूर्य समकालिक कक्षा में प्रवेश कर गया है और अब उसकी कमीश्निंग की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस प्रक्रिया के तहत निसार उपग्रह की पृथ्वी के अध्ययन के लिए कठोर जांच की जाएगी और इसका कक्षीय समायोजन किया जाएगा।

कमीश्निंग प्रक्रिया में लगेगा समय
NISAR उपग्रह को बीती 30 जुलाई को इसरो के रॉकेट जीएसएलवी-एफ16 से आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्पेस स्टेशन से लॉन्च किया गया था। नासा में प्राकृतिक आपदा अनुसंधान के कार्यक्रम प्रबंधक  गेराल्ड डब्ल्यू बावडेन ने बताया कि ‘निसार को 737 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया गया है और हमें वास्तव में इसे 747 किलोमीटर तक ऊपर उठना होगा और इस काम को पूरा होने में लगभग 45-50 दिन लगेंगे।’ उन्होंने बताया कमीश्निंग पूरी होने के बाद, सैटेलाइट के रडार सक्रिय हो जाएंगे और यह पृथ्वी की तस्वीरें और रियल टाइम डेटा भेजना शुरू कर देंगे।
इसरो और नासा में बढ़ रहा सहयोग
बावडेन ने बताया कि निसार मिशन से हमें बहुत ज्यादा डेटा मिलेगा और यह नासा के अब तक के किसी भी मिशन का सबसे ज्यादा डेटा होगा। इसरो के साथ संयुक्त मिशन और इसरो से मिली सीख पर बावडेन ने कहा कि नासा ने सीखा कि इसरो इस बात पर फोकस करता है कि कैसे विज्ञान की मदद से समाज का भला किया जाए। वहीं इसरो ने नासा से उसके गहरे वैज्ञानिक अध्ययन से सीख ली। निसार मिशन से दोनों देशों के वैज्ञानिक करीब आए हैं। नासा के एक अन्य वैज्ञानिक संघमित्रा बी दत्ता ने बताया कि दोनों अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है। हाल ही में भारत के एक अंतरिक्ष यात्री अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन होकर आए हैं। साथ ही भारत अपना मानव मिशन भेजने पर भी विचार कर रहा है।

NISAR मिशन क्यों है खास
इसरो ने पहले भी पृथ्वी के अध्ययन के लिए इस तरह के मिशन (रिसोर्ससैट, रीसैट) भेजे गए हैं, लेकिन वे मुख्य तौर पर भारतीय क्षेत्र पर ही केंद्रित हैं। इसरो ने बताया कि NISAR मिशन का लक्ष्य पूरी पृथ्वी का अध्ययन करना है और इससे पूरी दुनिया के वैज्ञानिक समुदाय को फायदा होगा। NISAR उपग्रह से हिमालय और अंटार्कटिका, उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों में स्थित ग्लेशियर्स पर जलवायु परिवर्तन का अध्ययन, वनों की स्थिति, पर्वतों की स्थिति में आने वाले बदलाव आदि का अध्ययन करने में मदद मिलेगी। साथ ही NISAR मिशन का उद्देश्य अमेरिका और भारतीय वैज्ञानिक समुदायों के साझा हित वाले क्षेत्रों में भूमि और बर्फ की स्थिति, भूमि पारिस्थितिकी तंत्र और समुद्री क्षेत्रों का अध्ययन करना है। आपदाओं की भविष्यवाणी में भी इससे मदद मिलेगी।

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Author: ILMA NEWSINDIA

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